अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1032, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! कण्वगोत्र वाले ऋषि तुम्हें हवि प्रदान करते हैं. रुम, रुशम और कृप राजाओं में एक साथ आनंद प्रकट करते हो. तुम इस यज्ञ में पधारो. (२) सूक्त-१२१ देवता—इंद्र अभि त्वा शूर नोनुमो ऽ दुग्धा इव धेनवः. ईशानमस्य जगतः स्वर्द्दमीशानमिन्द्र तस्थुषः.. (१) हे वीर इंद्र! हम तुम्हें उस गौ के समान प्रेरित करते हैं, जिस का दूध दुहा नहीं गया है. तुम संसार के स्वामी तथा स्वर्ग के स्रष्टा हो. (१) न त्वावाँ अन्यो दिव्यो न पार्थिवो न जातो न जनिष्यते. अश्वायन्तो मघवन्निन्द्र वाजिनो गव्यन्तस्त्वा हवामहे.. (२) हे इंद्र! कोई भी पार्थिव और दिव्य प्राणी तुम्हारी समानता नहीं कर सकता. (२) सूक्त-१२२ देवता—इंद्र रेवतीर्नः सधमाद इन्द्रे सन्तु तुविवाजाः. क्षुमन्तो याभिर्मदेम.. (१) यज्ञ में इंद्र का आगमन होने पर हम अन्न की विभिन्न विभूतियों से संपन्न होते हुए सुख प्राप्त करें. (१) आ घ त्वावान् त्मनाप्त स्तोतृभ्यो धृष्णवियानः. ऋ्णोरक्षं न चक्रयोः.. (२) हे इंद्र! तुम्हारी दया प्राप्त करने वाला पुरुष स्तोताओं के अनुग्रह से चलने वाले रथ के दोनों पहियों के अक्ष अर्थात् धुरे के समान दृढ़ हो जाता है. (२) आ यद् दुवः शतक्रतवा कामं जरितॄणाम्. ऋ्णोरक्षं न शचीभिः.. (३) हे इंद्र! तुम्हारा उपासक तुम से बल प्राप्त करता हुआ चलने वाले रथ के समान दृढ़ होता है. (३) सूक्त-१२३ देवता—इंद्र तत् सूर्यस्य देवत्वं तन्महित्वं मध्या कर्तोर्विततं सं जभार. यदेदयुक्त हरितः सधस्थादाद्रात्री वासस्तनुते सिमस्मै.. (१) वे सूर्य जब अपनी महिमा से रश्मियों को अपने में समेट लेते हैं, तब लोग फैले हुए अपने सब कार्यों को भी समेट लेते हैं. उस समय अंधकार को सब ओर से समेटती हुई पृथ्वी ebook converter DEMO Watermarks*