भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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वस्त्र धारण करती है. (१) तन्मित्रस्य वरुणस्याभिचक्षे सूर्यो रूपं कृणुते द्योरुपस्थे. अनन्तमन्यद् रुशदस्य पाजः कृष्णमन्यद्धरितः सं भरन्ति.. (२) मैं मित्र और वरुण की महिमा का गान करता हूं. वे सूर्य के रूप में स्वर्ग में अपने रूप का निर्माण करते हैं, जिस से उन का तेज प्रकाशित होता है. इन का दूसरा तेज काले रंग का है. उसे सूर्य की रश्मियां धारण करती हैं. (२) सूक्त-१२४ देवता—इंद्र कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा. कया शचिष्ठया वृता.. (१) सदा वृद्धि करने वाले ये सखा किस रक्षा साधन से हमारी रक्षा करेंगे? उन की रक्षात्मक वृत्ति किस प्रकार पूरी होगी? (१) कस्त्वो सत्यो मदानां मंहिष्ठो मत्सदन्धसः. दृळ्हा चिदारुजे वसु.. (२) हे इंद्र! हर्ष उत्पन्न करने वाली हवियों में सोम रूप अन्न का कौन सा अंश श्रेष्ठ है, जिस के द्वारा प्रसन्न होते हुए तुम धन को अपने भक्तों में विकीर्ण कर देते हो. (२) अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम्. शतं भवास्यूतिभिः.. (३) हे इंद्र! तुम हम स्तुतिकर्ताओं के सखा के समान हो. तुम हमारे सामने सैकड़ों बार प्रकट हुए हो. (३) इमा नु कं भुवना सीषधामेन्द्रश्च विश्वे च देवाः. यज्ञं च नस्तन्वं च प्रजां चादित्यैरिन्द्रः सह चीक्लृपाति.. (४) ऋत्विज् तथा सभी देवताओं के साथ इंद्र हमारे उस यज्ञ को पूर्ण करें. (४) आदित्यैरिन्द्रः सगणो मरुद्भिरस्माकं भूत्वविता तनूनाम्. हत्वाय देवा असुरान् यदायन् देवा देवत्वमभिरक्षमाणाः.. (५) देवत्व की रक्षा के लिए जिन देवों ने राक्षसों को नष्ट किया, वे इंद्र आदित्यों और मरुतों सहित हमारे शरीरों की रक्षा करें. (५) प्रत्यञ्चमर्कमनयंछचीभिरादित् स्वधामिषिरां पर्यपश्यन्. अया वाजं देवहितं सनेम मदेम शतहिमाः सुवीराः.. (६) वे देव अपने बल से सूर्य को सब के सामने उदय करते हैं. उन्होंने पृथ्वी को हवियों से