अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 217, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे शरीरधारी पुरुष! तू उस राजा की स्तुति कर जो विचरण करने वाला, तेजस्वी, स्वामी एवं उन गुणों से युक्त है, जो आप्त जनों में होते हैं. राजा पृथ्वी का प्रतिरूप है एवं युद्ध में जुटा हुआ है. (७) इमा ब्रह्म बृहद्दिवः कृणवदिन्द्राय शूषमग्रियः स्वर्षाः. महो गोत्रस्य क्षयति स्वराजा तुरश्चिद् विश्वमर्णवत् तपस्वान्.. (८) यह राजा स्वर्ग प्राप्ति की अभिलाषा से महान स्तोत्रों द्वारा इंद्र को प्रसन्न कर रहा है. स्वर्ग के स्वामी इंद्र मेघों के द्वारा जल वर्षा कर के विश्व को जल से पूर्ण करते हैं. (८) एवा महान् बृहद्दिवो अथर्वावोचत् स्वां तन्व १ मिन्द्रमेव. स्वसारौ मातरिश्वरी अरिप्रे हिन्वन्ति चैने शवसा वर्धयन्ति च.. (९) अपने शरीर को इंद्र मान कर महर्षि अथर्वा ने कहा था कि पाप रहित भगिनियां इसे बल के द्वारा बढ़ाती हुई प्रसन्न करती हैं. (९) सूक्त-३ देवता—अग्नि ममाग्ने वर्चो विहवेष्वस्तु वयं त्वेन्धानास्तन्वं पुषेम. मह्यं नमन्तां प्रदिशश्चतस्रस्त्वयाध्यक्षेण पृतना जयेम.. (१) हे अग्नि देव! युद्धों में हम वर्चस्वी बनें. हम तुम्हें प्रकट करते हुए अपने शरीर को शक्तिशाली बनाएं. चारों दिशाएं और प्रदिशाएं हमारे सामने तथा आप के संरक्षण में शत्रुओं की इस सेना पर विजय प्राप्त करें. (१) अग्ने मन्युं प्रतिनुदन् परेषां त्वं नो गोपाः परि पाहि विश्वतः. अपाञ्चो यन्तु निवता दुरस्यवो ऽ मैषां चित्तं प्रबुधां वि नेशत्.. (२) हे अग्नि देव! तुम हजारों शत्रुओं का क्रोध समाप्त करते हुए सभी ओर से हमारी रक्षा करो. हमें दुःख देने के इच्छुक लोग हमारे सामने नम्र बनें तथा हमारे सामने से चले जाएं. (२) मम देवा विहवे सन्तु सर्व इन्द्रवन्तो मरुतो विष्णुरग्निः. ममान्तरिक्षमुरुलोकमस्तु मह्यं वातः पवतां कामायास्मै.. (३) इंद्र के साथ मरुत्, विष्णु और अग्नि आदि सभी देव युद्ध भूमि में मेरे अनुकूल बनें. अंतरिक्ष में मेरा यशोगान गूंजे तथा वायु की गति मेरे अनुकूल हो. (३) मह्यं यजन्तां मम यानीष्टाकूतिः सत्या मनसो मे अस्तु. एनो मा नि गां कतमच्चनाहं विश्वे देवा अभि रक्षन्तु मेह.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*