भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 231, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 231

हे वरुण देव! तुम बारबार धन प्राप्ति के अवसरों के विषय में बताते हो. तुम इन व्यवहार करने वालों की उपेक्षा मत करो. अन्यथा ये तुम्हें धनहीन समझने लगेंगे. (७) मा मा वोचन्नराधसं जनासः पुनस्ते पृश्निं जरितर्ददामि. स्तोत्रं मे विश्वमा याहि शचीभिरन्तर्विश्वाुसु मानुषीषु दिक्षु.. (८) लोग बारबार तुम्हें धनहीन अथवा कंजूस न समझ लें, इसलिए मैं तुम्हें यह थोड़ा सा धन भेंट करता हूं. मेरी इच्छा है कि तुम्हारी यह स्तुति सारे संसार में फैल जाए और सभी दिशाओं में मनुष्य इसे गाएं. (८) आ ते स्तोत्राण्युद्यतानि यन्तून्वन्तर्विश्वा्सु मानुषीषु दिक्षु. देहि नु मे यन्मे अदत्तो असि युज्यो मे सप्तपदः सखासि.. (९) हे वरुण! मनुष्यों से युक्त सभी दिशाओं में तुम्हारी स्तुतियां फैल जाएं. तुम मुझे यह वस्तु दो जो अब तक नहीं दी है. तुम मेरे सप्तदा अर्थात् सात कदम साथ चलने वाले सखा हो. (९) समा नौ बन्धुर्वरुण समा जा वेदाहं तद्यन्नावेषा समा जा. ददामि तद् यत् ते अदत्तो अस्मि युज्यस्ते सप्तपदः सखास्मि.. (१०) हे बंधु वरुण! हम और तुम दोनों समान हैं. हमारी संतान भी समान हो. इन बातों को मैं जानता हूं. मैं ने तुम्हें अब तक जो नहीं दिया है, वह अब दे रहा हूं. मैं तुम्हारा सप्तदा सखा हूं. (१०) देवो देवाय गृणते वयोधा विप्रो विप्राय स्तुवते सुमेधाः. अजीजनो हि वरुण स्वधावन्नथर्वाणं पितरं देवबन्धुम्. तस्मा उ राधः कृणुहि सुप्रशस्तं सखा नो असि परमं च बन्धुः.. (११) हे अन्नधारक वरुण देव! देवगण देवों की स्तुति करते हैं तथा बुद्धिमान ब्राह्मण ब्राह्मणों की स्तुति करते हैं. हे सुधा के पात्र वरुण! तुम ने देवों को बंधु एवं हमारे पिता के समान अथर्व को जानने वाले को उत्पन्न किया है. तुम मुझे श्रेष्ठ धन में स्थापित करो. तुम हमारे सब से बड़े बंधु एवं सखा हो. (११) सूक्त-१२ देवता—अग्नि समिद्धो अद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान् यजसि जातवेदः. आ च वह मित्रमहश्चिकित्वान् त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः.. (१) हे उत्पन्न हुओं को जानने वाले अग्नि! तुम आज मनुष्य के यज्ञ में प्रज्वलित हुए हो और देवों का यजन कर रहे हो. तुम मित्रों की पूजा करने वाले एवं ज्ञाता हो. तुम देवों का आह्वान ebook converter DEMO Watermarks*

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 231, कुल 1063 में से · BharatKosha