अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 291, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअवैरहत्यायेदमा पपत्यात् सुवीरताया इदमा ससद्यात्. पराडेव परा वद पराचीमनु संवतम्. यथा यमस्य त्वा गृहे ऽ रसं प्रतिचाकशानाभूकं प्रतिचाकशान्.. (३) कबूतर और उल्लू के आने का जो अपशकुन है, वह हमारे वीरों की हिंसा न करे तथा हमारे वीरों के सद्भाव के निमित्त वह अपशकुन दूर चला जाए. हे यम के दूत कबूतर! तेरे स्वामी के घर में प्राणी जिस प्रकार तुझे प्रभावहीन समझते हैं, उसी प्रकार तुझे हम भी देखें. (३) सूक्त-३० देवता—शमी देवा इमं मधुना संयुतं यवं सरस्वत्यामधि मणावचर्कृषुः. इन्द्र आसीत् सीरपतिः शतक्रतुः कीनाशा आसन् मरुतः सुदानवः.. (१) देवों ने सरस्वती नदी के समीप मनुष्यों को शहद से युक्त जौ दिए. उस समय जोतने से भूमि में अन्न उत्पन्न करने के लिए इंद्र हल के स्वामी और शोभन दान वाले मरुत् किसान बने थे. (१) यस्ते मदो ऽ वकेशो विकेशो येनाभिहस्यं पुरुषं कृणोषि. आरात् त्वदन्या वनानि वृक्षि त्वं शमि शतवल्शा वि रोह.. (२) हे शमी नामक वृक्ष! तेरा जो मद मन चाहे केशों को उत्पन्न करने वाला और वृद्धि करने वाला है तथा जिस के द्वारा तुम पुरुष को सभी प्रकार प्रसन्न करते हो, मैं भी तुम से दूर स्थित वनों को काटता हूं. हे शमी! तू सौ शाखाओं वाला हो कर बढ़े. (२) बृहत्पलाशे सुभगे वर्षवृद्ध ऋतावरि. मातेव पुत्रेभ्यो मृड केशेभ्यः शमि.. (३) हे बड़ेबड़े पत्तों वाली, केवल वर्षा के जल से बढ़ने वाली एवं सौभाग्य सूचक शमी! माता जिस प्रकार पुत्रों को बढ़ाती है, तू उसी प्रकार हमारे केशों की वृद्धि कर. (३) सूक्त-३१ देवता—गौ आयं गौः पृश्निरक्रमीदसदन्मातरं पुरः. पितरं च प्रयन्त्स्वः.. (१) ये अगमनशील और तेजस्वी सूर्य उदयाचल पर पहुंच कर पूर्व दिशा में दिखाई दे रहे हैं और अपनी किरणों से सभी प्राणियों की माता भूमि को व्याप्त कर रहे हैं. इन्होंने स्वर्ग और अंतरिक्ष को ढक लिया है. ये सूर्य वर्षा का जल देने के कारण गौ कहे जाते हैं. (१) अन्तश्चरति रोचना अस्य प्राणादपानतः. व्यख्यन्महिषः स्वः.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*