भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 377, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 377

करती हूं, जिस से मैं तेरी असाधारण प्यारी हो सकूं. (२) प्रतीची सोममसि प्रतीच्युत सूर्यम्. प्रतीची विश्वान् देवान् तां त्वा ऽ च्छावदामसि.. (३) हे शंखपुष्पी नामक जड़ी! तू वशीकरण के निमित्त सोम के सम्मुख होती है. तू सब के प्रेरक सूर्य के भी सम्मुख होती है. अधिक कहने से क्या लाभ, तू सभी देवों के सम्मुख होती है. मैं अपने पति को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तेरी स्तुति करती हूं. (३) अहं वदामि नेत् त्वं सभायामह त्वं वद. ममेदसस्त्वं केवलो नान्यासां कीर्तयाश्चन.. (४) पति के वशीकरण के लिए जड़ीबूटी पा कर नारी अपने पति से कहती है—हे पति! आओ. अब मैं ही बोलूंगी. तुम कभी मत बोलना. तुम केवल विद्वानों की सभा में बोलना. हे पति! तुम केवल मेरे ही रहोगे, अन्य नारियों के नहीं. (४) यदि वासि तिरोजनं यदि वा नद्यस्तिरः. इयं ह मह्यं त्वामोषधिर्बद्ध्वेव न्यानयत्.. (५) हे पति! यदि तुम मेरी दृष्टि से ओझल हो जाओगे अथवा मुझ से दूर नदी के पार चले जाओगे, तब भी यह शंखपुष्पी नामक जड़ी पति से प्रेम करने वाली मेरे समीप तुम्हें इस प्रकार लाएगी, जैसे किसी को बांध कर लाया जाता है. (५) सूक्त-४० देवता—मंत्रों में बताए गए छंद दिव्यं सुपर्णं पयसं बृहन्तमपां गर्भं वृषभमोषधीनाम्. अभीपतो वृष्ट्या तर्पयन्तमा नो गोष्ठे रयिष्ठां स्थापयति.. (१) हे इंद्र! हमारी गोशाला में दिव्य, शोभन गति वाले, जल से पूर्ण, महान जलों के मध्य रहने वाले, जड़ीबूटियों की वृद्धि के लिए वर्षा करने वाले, सभी ओर से जलों से संगत एवं सारे संसार को वर्षा से तृप्त करने वाले सारस्वत नामक देव को स्थापित करो. वे सदा धन वाले प्रदेश में ठहरते हैं. (१) सूक्त-४१ देवता—सरस्वान यस्य व्रतं पशवो यन्ति सर्वे यस्य व्रत उपतिष्ठन्त आपः. यस्य व्रते पुष्टपतिर्निविष्टस्तं सरस्वन्तमवसे हवामहे.. (१) समस्त पशु अपनी पुष्टि के निमित्त जिस के कर्म का अनुगमन करते हैं, जिस के कर्म में जल आपस में मिलते हैं तथा जिस के कर्म के अधीन पोषण के स्वामी हैं, उन सरस्वान देव ebook converter DEMO Watermarks*