भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 813, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 813

हे प्रेत! हम दहन के स्थान से पश्चिम दिशा में पहले से स्थित तथा कंबल से ढकी हुई स्वधा नाम की पितृदेवता में तुझे स्थापित करते हैं. दाताओं द्वारा ब्राह्मणों को दान में दी गई पृथ्वी जिस प्रकार ऊपर की दिशा में स्वर्ग का पालन करती है, उसी प्रकार स्वधा नाम की पितृदेवता तुम्हारा पालन करें. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों की पूजा हम हवि के द्वारा करते हैं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग लेने वाले बनो. (३२) उदीच्यां त्वा दिशि पुरा संवृतः स्वधायामा दधामि बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (३३) हे प्रेत! हम दहन के स्थान से उत्तर दिशा में पहले से स्थित तथा कंबल से ढकी हुई स्वधा नाम की पितृ देवता में तुझे स्थापित करते हैं. दाताओं द्वारा ब्राह्मणों को दान की गई पृथ्वी जिस प्रकार ऊपर की दिशा में स्वर्ग का पालन करती है उसी प्रकार स्वधा नाम की पितृदेवता तुम्हारा पालन करें. पुण्य के फल में रूप में स्वर्ग का प्रवर्तन करने वालों की पूजा हम हवि के द्वारा करते हैं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग लेने वाले बनो. (३३) ध्रुवायां त्वा दिशि पुरा संवृतः स्वधायामा दधामि बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (३४) हे प्रेत! स्थिर रहने वाली नीचे की दिशा में हम तुझे पहले से स्थित तथा कंबल से ढकी हुई स्वधा नाम की पितृ देवता में स्थापित करते हैं. जिस प्रकार दाताओं द्वारा ब्राह्मणों के लिए दान की गई पृथ्वी ऊपर की दिशा में स्वर्ग की रक्षा करती है, उसी प्रकार स्वधा नाम की पितृ देवता तुम्हारा पालन करें. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों की पूजा हम हवि के द्वारा करते हैं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग लेने वाले बनो. (३४) ऊर्ध्वायां त्वा दिशि पुरा संवृतः स्वधायामा दधामि बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (३५) हे प्रेत! मैं तुझे ऊपर की दिशा में स्थित स्वधा नाम की पितृ देवता में स्थापित करता हूं. मैं पहले से ही कंबल से ढका हुआ हूं. जिस प्रकार पुण्य करने वालों द्वारा ब्राह्मणों को दान की हुई पृथ्वी ऊपर की दिशा में स्थित स्वर्ग का पालन करती है, उसी प्रकार स्वधा देवी तुम्हारा पालन करें. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों की पूजा मैं हवि के द्वारा करता हूं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग लेने वाले बनो. (३५) धर्तासि धरुणो ऽ सि वंसगो ऽ सि.. (३६) हे अग्नि! तुम सब के धारणकर्ता एवं धरुण हो. (३६) ebook converter DEMO Watermarks*