भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 987, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 987

यज्ञ कर्म की रक्षा करने वाले इंद्र में सैकड़ों पराक्रम व्याप्त हैं. हमें उन्हीं की सेवा करनी चाहिए. (७) मा नो मर्ता अभि द्रुहन् तनूनामिन्द्र गिर्वणः. ईशानो यवया वधम्.. (८) हे इंद्र! हमारे शत्रु हमारी देह के प्रति हिंसा की भावना न रखें. हे स्वामी इंद्र! तुम हमारे वध रूप कारण को हम से दूर हटाओ. (८) युञ्जन्ति ब्रध्नमरुषं चरन्तं परि तस्थुषः. रोचन्ते रोचना दिवि.. (९) इंद्र के रथ में हरे रंग के अथवा हरि नाम के घोड़े जोते जाते हैं. आकाश में चमकते हुए वे घोड़े स्थावर और जंगम दोनों प्रकार के प्राणियों को लांघते हैं. (९) युञ्जन्त्यस्य काम्या हरी विपक्षसा रथे. शोणा धृष्णू नृवाहसा.. (१०) सारथी इंद्र के रथ में हरि नाम के अथवा हरित वर्ण के घोड़ों को जोड़ते हैं. इंद्र के रथ के दोनों ओर रहने वाले घोड़े ऐसी सवारी हैं, जिस की कामना की जाती है. वे घोड़े सब को वश में करते हैं. (१०) केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे. समुषद्भिरजायथाः.. (११) हे मरणधर्मा मनुष्यो! सूर्य रूप इंद्र अज्ञानी को अन्न और अंधकार में छिपे हुए पदार्थ को रूप देते हैं. सूर्य रूप इंद्र अपनी किरणों से उदय हुए हैं. इन के दर्शन करो. (११) आदह स्वधामनु पुनर्गर्भत्वमेरिरे. दधाना नाम यज्ञियम्.. (१२) मरुद्गण हवि देने वाले की गर्भ में स्थित संतान की रक्षा करने के कारण यज्ञिय नाम धारण करते हैं. (१२) सूक्त-७० देवता—इंद्र वीळु चिदारुजत्नुभिर्गुहा चिदिन्द्र वह्निभिः. अविन्द उस्रिया अनु.. (१) हे इंद्र! तुम ने उषा काल के बाद ही अपनी ज्योति वाली शक्तियों के द्वारा गुफा में छिपे धन को प्राप्त किया था. (१) देवयन्तो यथा मतिमच्छा विदद् वसुं गिरः. महामनूषत श्रुतम्.. (२) हे स्तुतियो! हम स्तोता देवताओं की इच्छा करते हैं. हम इंद्र के सामने अपनी उत्तम बुद्धि को प्रस्तुत करेंगे. इस प्रकार उन महिमा वाले इंद्र की स्तुति की जाएगी. (२) ebook converter DEMO Watermarks*