अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 990, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंवयं शूरैभिरस्तृभिरिन्द्र त्वया युजा वयम्. सासह्वाम पृतन्यतः.. (२०) हे इंद्र! हमारे वीरों की कोई हिंसा न कर सके. हम अपने वीरों को साथ ले कर उन शत्रुओं को भी वश में कर लें जो सेना साथ ले कर हम पर आक्रमण करते हैं. (२०) सूक्त-७१ देवता—इंद्र महाँ इन्द्रः परश्च नु महित्वमस्तु वज्रिणे. द्यौर्न प्रथिना शवः.. (१) श्रेष्ठ और महान इंद्र महिमा वाले हैं. उन का पराक्रम आकाश के समान विशाल हो. (१) समोहे वा य आशत नरस्तोकस्य सनितौ. विप्रासो वा धियायवः.. (२) जो मनुष्य युद्ध की कामना करते हैं, वे अपने पुत्रों के साथ भी युद्ध करने लगते हैं. (२) यः कुक्षिः सोमपातमः समुद्र इव पिन्वते. उर्वीरापो न काकुदः.. (३) सोमरस पीने वाले इंद्र की कोख ककुद अर्थात् ठाट वाले बैल तथा अधिक जल को धारण करने वाले सागर के समान बढ़ जाती है. (३) एवा ह्यस्य सूनृता विरप्शी गोमती मही. पक्वा शाखा न दाशुषे.. (४) इंद्र को गौ प्रदान करने वाली धरती हवि देने वाले यजमान के लिए उस वृक्ष की शाखा के समान हो जाती है, जिस पर पके हुए फल लगे होते हैं. (४) एवा हि ते विभूतय ऊतय इन्द्र मावते. सद्यश्चित् सन्ति दाशुषे.. (५) हे इंद्र! जो यजमान तुम्हें हवि देता है, उस के निमित्त तुम्हारे रक्षा साधन सदा प्रस्तुत रहते हैं. (५) एवा ह्यस्य काम्या स्तोम उक्थं च शंस्या. इन्द्राय सोमपीतये.. (६) इंद्र जब सोमरस पीते हैं, उस समय स्तोम, उक्थ और शस्त्र नाम वाले मंत्र उन के लिए प्रसन्न करने वाले होते हैं. (६) इन्द्रेहि मत्स्यन्धसो विश्वेभिः सोमपर्वभिः. महां अभिष्टिरोजसा.. (७) हे इंद्र! यहां अर्थात् हमारे यज्ञ में आओ. सोमयागों में सोमरस पीने के कारण उत्पन्न तुम्हारा हर्षपूर्ण ओज हमारे लिए अभीष्ट और महान है. (७) एमेनं सृजता सुते मन्दिमिन्द्राय मन्दिने. चक्रिं विश्वानि चक्रये.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*