भारतकोश
बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

महर्षि बौधायन द्वारा

स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)

DevanagariHindipublished486 पृष्ठ

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३४८ बौधायन-धर्मसूत्रम् [ यावकव्रतम्

सभी ज्योतियों में श्रेष्ठ है। हे दीक्षा, मुझे मत छोड़ो, मत छोड़ो ) का जप करे और यदि उसके ऊपर वृष्टि हो तो 'उन्दतीर्बलं धत्ते' मन्त्र का जप करे ॥ २३ ॥

व्याख्यातो मन्त्रः 'उत्तरत उपचारः' इत्यत्र । एते नियमा आ परिसमाप्तेश्चान्द्रायणस्याऽनुसरणीयाः ॥ २३ ॥

प्रथमायामपरपक्षस्य चतुर्दश ग्रासान् ॥ २४ ॥

अनु०—उत्तर पक्ष के प्रथम दिन को चौदह ग्रास भोजन करे ॥ २४ ॥

प्राश्नातोत्यनुवर्तते । अपरपक्षस्य च प्रतिपदि चतुर्दश ग्रासा प्रसनीया इत्यर्थः ॥ २४ ॥

एवमेकापचयेनाऽमावास्यायाः ॥ २५ ॥

अनु०—इसी प्रकार प्रतिदिन एक-एक ग्रास अमावास्या तक कम करता जाये ॥ २५ ॥

एवं द्वितीयाप्रभृतिषु एकैको ग्रासोऽपचीयते । द्वितीयास्यां त्रयोदश तृतीयस्यां द्वादश इत्यादि ॥ २५ ॥

एवममावास्याया नीयमाने—

अमावास्यायां ग्रासो न विद्यते ॥ २६ ॥

अनु०—अमावस्या के दिन एक भी ग्रास अवशिष्ट नहीं रहता ॥ २६ ॥

अतस्तस्यामुपवास एव ॥ २६ ॥

प्रथमायां पूर्वपक्षस्यैकः ॥ द्वौ द्वितीयस्याम् ॥ २७-२८ ॥

अनु०—पूर्वपक्ष की प्रतिपदा को एक ग्रास भक्षण करे और द्वितीया को दो ग्रास खाए ॥ २७-२८ ॥

एते अप्यृज्वर्थे ॥ २७-२८ ॥

एवमेकोपचयेनाऽऽपौर्णमास्याः ॥ २९ ॥

अनु०—इसी प्रकार पौर्णमसी तक एक-एक ग्रास बढ़ाता रहे ॥ २९ ॥

उपचयो वृद्धिः । एवमा पौर्णमास्या नीयमाने चतुर्दश्यां चतुर्दश भवन्ति ॥ २९ ॥

पौर्णमास्यां स्थालीपाकस्य जुहोति ॥ ३० ॥

तत्रैते पक्वहोममन्त्राः—

अग्नये या तिथिस्स्यात् ॥ ३१ ॥