बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
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बौधायन-धर्मसूत्रम्
| उद्धरण | सन्दर्भ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| रात्रावचिरेवाऽनेदंदशे | ४२ | |
| रात्रिशेषे द्वाभ्यां | गौ. ध. १४. ७. | ८४ |
| रौरवयौधाजने नित्यं | गौ. ध. २६. ९. | २४९ |
| वचनाद्दोषतो भेदाः | नार. १. १५७. | १३८ |
| वरुणाय धर्मपतये | तै. सं. १. ८. १०. | ३२७ |
| वर्णान्तरगमनं | गौ. ध. ४. २२. | १२४ |
| वर्त्तयंस्तु सिलोञ्छाभ्याम् | मनु. ४. १०. | १७१ |
| वर्षासु रथकारः | १२५ | |
| वलीपलितकालेऽपि | १७१ | |
| वसाऽसृङ्मज्जशुक्रमजा | मनु. ५. १३५ | ५६ |
| वाग्घोता | तै. आ. ३. ६. | ३४० |
| वाचा प्रशस्तमुपयुञ्जीत | वशिष्ठः | ६२ |
| वानप्रस्थयतिब्रह्मचारिणां | याज्ञ. स्मृ. २. १३७ | २१३ |
| वायुरन्तरिक्षस्याऽधिपतिः | तै सं. ३. ४. ५. | ३४४ |
| वारुणं यवमयं | तै. सं. १. ८. ८. | ३२७ |
| विदा मघवन् | ३५९ | |
| विद्यानुष्ठानसम्पन्नः | लघुशाता. ५३. | २०९ |
| विधियज्ञाज्जपयज्ञः | मनु. २. ८५. | २४० |
| विधूमे सन्नमुसले | मनु. ६. ५६. | २५२ |
| विभागञ्चेत्पिता कुर्यात् | याज्ञ. २. ११४ | १८१ |
| विहितोरुस्रुत | ऋ. सं. ८. ४, १. | १०२ |
| विंशतिभागः शुल्कः | गौ. ध. १०. २५ | १३१ |
| विंशो भागः पणस्य | ७१ | |
| वित्र्यङ्गैर्हीनानां | मनु. २. १८४. | २२ |
| वेदसन्यासिकानान्तु | मनु. ६. ८६. | ३०२ |
| वेदानधीत्य वेदौ वा | मनु. ३. २. | १८ |
| वेदाहमेतं पुरुषं | तै आ. ३. १२. | ३७८ |
| वैदिकाश वेदिं कल्पयन्ते | १०४ | |
| वैश्वानराय प्रतिवेश्यायः | तै. आ. २. ६. | ३३७ |
| वैश्वानरो न ऊत्या | तै. सं. १. ५. ११. | ४०० |
| वैष्णवान् खनामि | तै. सं. १. ३. २. | २३९ |
| व्यभिचारेण वर्णानां | मनु. १०. २४. | १२४ |
| व्यस्तस्तपाणिना कार्यं | मनु. २. ७२. | २३ |
| शन्नो देवीः | सा. सं. पू. १. १. | ३५९ |
| शय्यासनमलङ्कारं | मनु. ९. १७. | १९३ |
| शस्त्रेण च प्रजापालनम् | व. ध. २. २२. | १२८ |
| शाखानां विप्रकीर्णत्वात् | तं. वा. १. ३. १. | ७ |