बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 475, कुल 486 में से
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परिशिष्टम्
४२१
| उद्धरण | सन्दर्भ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| शुश्रूषा शूद्रस्य | आप. ध. १. १. ७ | १२९ |
| श्रुष्ट्यग्ने नवस्य मे | सा. सं. पू. २. १. १. १०. | २७० |
| शूद्रश्चेद्व्राह्मणमभिगच्छेत् | व. ध. २१. १. | १९५ |
| शेषेषूपवसेदहः | मनु. ५. २०. | ९८ |
| श्रेयासं श्रेयांसं | व. ध. ११. ५. | २६६ |
| श्रोत्रं त्वक्चक्षुषी | मनु. २. ९०. | १७२ |
| श्वभिः खादेयद्राजा | गौ. ध. २३, १४. | १३३ |
| श्वेताश्च मृगा वन्याः | व. ध. ३. ४४ | ६० |
| षड्भिः परिहार्यो राजा | गौ. ध. ८. १२. | १३२ |
| षष्ठीं चितिम् | तै. सं. ५. ४. २. २. | ३८५ |
| सकामेन सकामायाम् | १४३ | |
| सखिभार्यां समाहृत्य | संव. स्मृ. १. १६४. | १५ |
| सङ्ग्रामे संस्थानं | गौ. ध. १०. १५. | २८३ |
| सचित्रचित्रं | ऋ. मं. ४. ५. ८. | ३४७ |
| सति प्रभूते पयसि | २३४ | |
| सत्येन शापयेद्विप्रम् | मनु. ८. ११३. | ७२ |
| सद्यः पतति मांसेन | व. ध. २. ३१. | ३६४ |
| सन्ध्यायां गायत्र्या अभि | तै. आ. २. २. | २२६ |
| सन्न्यस्य दुर्मतिः कश्चित् | संवर्त. स्मृ. १७१. | २८२ |
| सन्धिनीक्षीरमवत्साक्षीरं | व. ध. १४. २९ | ९७ |
| स पापिष्ठो विवाहानां | मनु. ३. ३४. | १४२ |
| सपिण्डाः पुत्रस्थानीया वा | व. ध. १७. ७२. | ८२ |
| सपिण्डे तु त्रिरात्रं | १४७ | |
| सम्मार्जनेनाऽञ्जनेन | मनु. ५. १२४. | ४३ |
| सम्यग्दर्शनसम्पन्नः | मुण्ड. उ. २. २. | २५६ |
| संवीतं मानुषं | तै. आ. २. १. | ४७ |
| स य इदमविद्वान् | छा. उ. ५. २४. १. | २६४ |
| सवर्णाग्रे द्विजातीनां | मनु. ३. १२. | १२२ |
| सव्याहृतिं सप्रणवां | व. ध. २५. १३. | २२८ |
| सर्वे एते पुण्यलोका भवन्ति | छा. उ. २. २३. १. | ५ |
| सर्वत एवाऽऽत्मानं गोपायेत् | गौ. ध. ९. ३५. | १६२ |
| सर्वं हि विचरेद्ग्रामम् | मनु. २. १८५. | २२ |
| सर्वान्परित्यजेदर्थान् | मनु. ४. १७. | ७४ |
| सर्वेषामपि चैतेषाम् | मनु. ६. ८९. | २५९ |
| सशिखं वपनं कृत्वा | परा. स्मृ. ८. ३९. | १८३ |
| सह शाखया प्रस्तरं | आप. श्रौ. ३. ३. ६. | १०३ |
| सहोवाच किं मेऽन्नं | छा. उ. ५. २. १. | ९४ |