बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
पृष्ठ 18, कुल 122 में से
संदर्भ में पढ़ें16 साहिब बन्दगी
(1) साहिब को गाय जीवित करने को कहा गया
बनारस में कबीर साहिब समाज को पाखण्ड से छुड़ाकर सत्य भक्ति में लगा रहे थे। दिल्ली में सिकंदर लोधी का राज्य था। राजा जलन रोग से बहुत पीड़ित था। उसने बहुत उपचार किये, पर रोग शांत न हो सका। उधर पंडित, काजी, मुल्ला, मौलवी साहिब की बढ़ती हुई सत्य भक्ति को देख परेशान थे। उनका कारोबार समाप्त हो रहा था। घबराकर उन्होंने एक षड़यंत्र रचा और राजा से कहा कि बनारस में कोई कबीर नाम का साधु रहता है; वही आपकी जलन को समाप्त कर सकता है। यह सुनते ही राजा ने मुल्ला, मौलवियों, पीरों आदि को साथ ले बनारस चले आए। बादशाह ने कबीर साहिब को अपने पास आने का निमंत्रण दिया। पंडित, मुल्ला आदि यह सोचकर प्रसन्न हो रहे थे कि अब कबीर की ख़ैर नहीं है। कबीर तो उलटवसीया है; वो कोई उल्टी बात कर देगा और राजा उसका सिर काट देगा। पर हुआ इसके उलट। साहिब के दर्शन पाते ही बादशाह का जलन रोग शांत हो गया। उसने गहरे सुख की अनुभूति की। उसके दिल में साहिब के प्रति प्रेम उत्पन्न हो गया। वो साहिब का बहुत ही आदर-सत्कार करते हुए राजदरबार में ले गया और अपने सिंहासन पर बिठाकर स्वयं उनके चरणों के पास बैठ गया। यह देख काज़ी, पंडित, मौलवियों को बहुत ईर्ष्या हुई। राजा का पीर गुरु शेख तकी का हृदय तो मारे ईर्ष्या के जल गया। सबने तकी के पास जाकर कहा कि कबीर काफ़िर है; यह धर्म के ख़िलाफ़ बोलता है, किसी को नहीं मानता है। तकी राजा सिकंदर के पास उनकी फ़रियाद लेकर गया और कहा कि आप खुदाय रसूल का उल्लंघन कर पाप कमा रहे हैं। राजा सोच में पड़ गया। राजा ने साहिब के पास आकर सारा हाल बताया। राजा ने कहा कि मैं आपको खुदा का ही रूप मानता हूँ, पर इन लोगों की शंका का समाधान करो। साहिब ने उनकी शंका का समाधान करना स्वीकार कर लिया। राजदरबार लगा हुआ था। साहिब भी वहाँ पहुँचे। शेख तकी धर्म गुरु होने के साथ-साथ राजा का वज़ीर भी था। इसलिए उसकी बात कोई टाल नहीं सकता था। उसने एक गाय मंगवाकर क़त्ल करवा दी। शेख तकी ने राजा से कहा कि यदि कबीर खुदा का रूप है तो इस गाय को जीवित कर दे। राजा ने साहिब की ओर देखा और उनसे ऐसा करने की प्रार्थना की। राजा की प्रार्थना को मानते हुए साहिब ने गाय को अपनी मधुर आवाज़ में पुकारा। साहिब के मीठे शब्द सुनते ही गाय जीवित हो गयी और उठकर साहिब के चरणों को चाटने लगी। पूरा दरबार यह कौतक देख बहुत हैरान हुआ। सब साहिब की जय-जयकार करने लगे और राजा यह कौतक देख इतना प्रभावित हुआ कि वो सबके सामने साहिब के चरणों में लेट गया। यह देख सब के चेहरे मुरझा गये।
जीवित गाय देख कर सब कोई हुआ हैरान।
शर्मसार हुये पाखण्डी, बड़ी साहिब की शान॥