बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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संदर्भ में पढ़ें6 साहिब बन्दगी
मानवता का महान् मसीहा
सतगुरु कबीर साहिब
सम्वत् 1455 सुदी 1398 ई. पूर्णिमा सोमवार के दिन अमृत वेला में महान् मानवतावादी सन्त सद्गुरू कबीर साहिब का अवतरण काशी के लहरतारा नामक तलाब में हुआ। उनके जन्म के विषय में जितनी शंकाएँ और भ्रम लोगों में हैं शायद ही किसी अन्य महात्मा के विषय में हो। किसी ने उन्हें कुंवारी ब्राह्मणी की सन्तान बताया, किसी ने अज्ञात बालक। किसी ने कुछ, किसी ने कुछ। आज भी उनका जन्म एवं जीवन संसार के लोगों के लिए रहस्य है। हालांकि उन्होंने अपने जीवन के विषय में स्वयं अपने शब्दों में रहस्य प्रकट किए हैं। अपना विवरण दिया है कि मैं उस परम सत्ता से शुद्ध चेतन रूप में अवतरित हुआ हूँ :
"सन्तों अविगत से हम आए, कोई भेद भरम ना पाये।
ना हम रहले गर्भवास में, बालक होई दिखलाये।
काशी तट सरोवर भीतर, तहाँ जुलाहा पाये॥
ना हमारे भाई बन्धु है, ना संग गिरही दासी।
नीरू के घर नाम धराये, जग में हो गई हाँसी॥
आणे तकिया अंग हमारी, अजर अमर पुर डेरा।
हुक्म हैसियत से चल आए, काटत यम का फेरा॥
काशी में हम प्रकट हुए, रामानन्द पर धाया।
कहै कबीर सुनो भाई साधो, हंस चेतावन आया।।"
ऐसे अनेक स्थानों पर कबीर साहिब ने अपने विषय में अद्भुत रहस्य प्रकट किए हैं जिनके द्वारा प्रतीत होता है कि वे माता के पेट से नहीं जन्मे एवं उस परम पुरुष के अद्भुत प्रकाश से इस धरती पर उनका अवतरण हुआ। प्रिय पाठको! मेरा अभिप्राय किसी विवाद या संशय को उत्पन्न करना नहीं है, वरन् एक महान् सत्य को तर्क युक्त तरीके से आपके समक्ष रखना है। कबीर शब्द अपने आप में अर्थ समेटे है। कथावीर कबीर कहाया।
कक्का केवल नाम है, बब्बा वरण शरीर।
ररा सब में रम रहा, जिसका नाम कबीर॥
गगन मण्डल से उतरे, सद्गुरु सत्य कबीर।
जल मांहि पौढ़न किया, सब पीरों के पीर॥
ऐसे अनेकों शब्द स्पष्ट कर रहे हैं कि वे असाधारण थे। जितना विस्तृत व्यक्तित्व कबीर साहिब का मिलता है शायद ही किसी अन्य का हो।