भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४० 'तुला' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १—'तुला' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ८३० से ८४१ के बीच देखना चाहिए। २—'तुला' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— चित्त महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ८३० (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ८३१ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ८३२ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ८३३ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ८३४ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ८३५ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ८३६ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ८३७ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ८३८ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ८३९ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ८४० (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ८४१ 'तुला' लग्न में 'शनि' का फलादेश १. 'तुला' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ८४२ से ८५३ के बीच देखना चाहिए। २. 'तुला' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए। जिस वर्ष में 'शनि'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ८४२ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ८४३ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ८४४ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ८४५ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ८४६ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ८४७