भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 330, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें३३६ का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'बुध'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ८०६ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ८०७ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ८०८ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ८०९ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ८१० (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ८११ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ८१२ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ८१३ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ८१४ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ८१५ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ८१६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ८१७ 'तुला' लग्न में 'गुरु' का फलादेश १—'तुला' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ८१८ से ८२९ के बीच देखना चाहिए । २—'तुला' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'गुरु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ८१८ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ८१९ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ८२० (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ८२१ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ८२२ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ८२३ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ८२४ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ८२५ यत (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ८२६ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ८२७ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ८२८ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ८२९