बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
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( १३८० )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | सं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| स होवाचोवाच वै सो० | ३ | ३ | २ | ६६४ |
| स होवाचोषस्तश्चाक्रायणो | ३ | ४ | २ | ७०२ |
| सा चेदस्मै न दद्यात्का० | ६ | ४ | ७ | १३४३ |
| सा चेदस्मै दद्यादि० | ६ | ४ | ८ | १३४४ |
| साम प्राणो वै साम | ५ | १३ | ३ | १२२० |
| सा वा एषा देवता | १ | ३ | ६ | १२२ |
| सा वा... पाप्मानं मृत्युमपहत्य | १ | ३ | १० | १२५ |
| सा वा... मृत्युमपहत्याथैना | १ | ३ | ११ | १२७ |
| सा ह वागुवाच | ६ | १ | १४ | १२६२ |
| सा होवाच नमस्तेऽस्तु | ३ | ८ | ५ | ७६३ |
| सा होवाच ब्राह्मणा | ३ | ८ | १२ | ७८० |
| सा होवाच मैत्रेयी। यन्नु म इयं भगोः सर्वार | ४ | २ | ५४५ | |
| सा होवाच... वित्तेन पूर्णा स्यात्स्यां | ४ | ५ | ३ | ११३० |
| सा होवाच मैत्रेयी येनाहं | २ | ४ | ३ | ५४६ |
| ,, ,, | ४ | ५ | ४ | ११३० |
| सा होवाच मैत्रेय्यत्रैव मा भगवानमू० | २ | ४ | १३ | ५७२ |
| सा होवाच... भगवान्मो० | ४ | ५ | १४ | ११३८ |
| सा होवाच यदूर्ध्वं याज्ञ० | ३ | ८ | ३ | ७६१ |
| ,, ,, | ३ | ८ | ६ | ७६४ |
| सा होवाचाहं वै त्वा | ३ | ८ | २ | ७५६ |
| सैषा गायत्र्येताँस्म्र्स्तुरीये | ५ | १४ | ४ | १२२८ |
| सोऽकामयत द्वितीयो | १ | २ | ४ | ७२ |
| सोऽकामयत भूयसा | १ | २ | ६ | ७८ |
| सोऽकामयत मेध्यं | १ | २ | ७ | ८० |
| सोऽबिभेतस्मादेकाकी | १ | ४ | २ | १६८ |
| सोऽस्यास्य आङ्गिरसो० | १ | ३ | १६ | १३८ |
| सोऽवेपहं वाव सृष्टि० | १ | ४ | ५ | १८० |
| सोष्यन्तीमद्भिरभ्युक्षति | ६ | ४ | २३ | १३५८ |
| सो हेयमीक्षाञ्चक्रे | १ | ४ | ४ | १७८ |
| स्वप्नान्त उच्चावचमीय० | ४ | ३ | १३ | ६३७ |
| हस्तौ वै ग्रहः | ३ | २ | ८ | ६५६ |
| हिरण्मयी अरणी | ६ | ४ | २२ | १३५८ |
| हिरण्मयेन पात्रेण | ५ | १५ | १ | १२४१ |
मुद्रक—नया संसार प्रेस, भदेनी, वाराणसी-१