भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 978 में से

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पृष्ठ 136
१३२छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय १

| अन्विष्य भगवतो वा अहम-<br>वित्त्यालाभेनान्यानिमानवृषि-<br>तवानस्मि ॥ २ ॥ | की थी । ढूँढ़नेपर श्रीमान्‌के न<br>मिलनेसे ही मैंने इन दूसरे ऋत्विजों-<br>का वरण किया था ॥ २ ॥ |

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भगवांस्त्वेव मे सर्वैरात्विज्यैरिति तथेत्यथ तर्ह्येत एव समतिसृष्टाः स्तुवतां यावद्धेभ्यो धनं दद्यास्तावन्मम दद्या इति तथेति ह यजमान उवाच ॥ ३ ॥

मेरे समस्त ऋत्विक्कर्मोंके लिये श्रीमान् ही रहें—ऐसा सुनकर उषस्तिने 'ठीक है' ऐसा कहा—[ और बोला— ] 'अच्छा तो मेरे द्वारा प्रसन्नतासे आज्ञा दिये हुए ये ही लोग स्तुति करें; और तुम जितना धन इन्हें दो उतना ही मुझे देना।' तब यजमानने 'ऐसा ही होगा' यह कहा ॥ ३ ॥

| अद्यापि भगवांस्त्वेव मे मम सर्वैरात्विज्यैर्ऋत्विक्कर्मार्थमस्त्वित्युकस्तथेत्याहोषस्तिः । किं त्वथैवं तर्ह्येत एव त्वया पूर्वं वृता मया समतिसृष्टा मया सम्यक्प्रसन्नेनानुज्ञाताः सन्तः स्तुवताम् । त्वया त्वेतत्कार्यम् , यावद्धेभ्यः प्रस्तोत्रादिभ्यः सर्वेभ्यो धनं दद्याः प्रयच्छसि तावन्मम दद्याः । इत्युक्तस्तथेति ह यजमान उवाच ॥ ३ ॥ | 'अब भी श्रीमान् ही मेरे सम्पूर्ण ऋत्विक्कर्मोंके लिये रहें' ऐसा कहे जानेपर उषस्तिने कहा—'अच्छा, किंतु तुमने पहले जिनका वरण कर लिया है वे ही ऋत्विग्गण मेरे द्वारा समतिसृष्ट हो—प्रसन्नतासे आज्ञा प्राप्त कर स्तवन करें। तुम्हें तो यही करना होगा कि जितना धन तुम इन सम्पूर्ण प्रस्तोता आदिको दोगे उतना ही मुझे देना।' ऐसा कहे जानेपर यजमानने 'ऐसा ही होगा' यह कहा ॥ ३ ॥ |

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