भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 252
२४८छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय ३

| कर्मफलाख्यं मधु भोक्ष्यामह इत्येवं हि यशआदिलक्षणफलप्राप्तये कर्माणि क्रियन्ते मनुष्यैः केदारनिष्पादनमिव कर्षकैः । तत्प्रत्यक्षं प्रदर्श्यते श्रद्धाहेतोस्तद्वा एतत् । किं तत् ? यदेतदादित्यस्योद्यतो दृश्यते रोहितं रूपम् ॥ ४ ॥ | मधुको भोगेंगे—इस प्रकार यश आदिरूप फलकी प्राप्तिके लिये मनुष्योंद्वारा कर्म किये जाते हैं, जैसे कि कृषकलोग-[धान्यादिकी प्राप्तिके लिये] क्यारियाँ बनाते हैं। श्रद्धाकी उत्पत्तिके लिये अब उसे प्रत्यक्ष प्रदर्शित किया जाता है—वह निश्चय यह है। वह क्या है ? यह जो उदित होते हुए सूर्यका रोहित (लाल) रूप देखा जाता है ॥ ४ ॥ |


इतिच्छान्दोग्योपनिषदि तृतीयाध्याये
प्रथमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १ ॥