भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 352
३४८छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय ३

है, जो धमनियां थीं वे नदियाँ हैं तथा जो वस्तिगत जल था वह समुद्र है ॥ २ ॥

| तत्तयोः कपालयोर्यद्रजतं कपालमासीत्, सेयं पृथिवी पृथिव्युपलक्षितमधोऽण्डकपालमित्यर्थः। यत्सुवर्णं कपालं सा द्यौर्द्युलोकोपलक्षितमूर्ध्वं कपालमित्यर्थः। यज्जरायु गर्भपरिवेष्टनं स्थूलमण्डस्य द्विशकलीभावकाल आसीत्, ते पर्वता बभूवुः। यदुल्बं सूक्ष्मं गर्भपरिवेष्टनम्, तत्सह मेघैः समेघो नीहारोऽवश्यायो बभूवेत्यर्थः। या गर्भस्य जातस्य देहे धमनयः शिराः, ता नद्यो बभूवुः। यत्तस्य वस्तौ भवं वास्तेयमुदकम्, स समुद्रः ॥२॥ | उन खण्डोंमें जो रजतमय खण्ड था वही यह पृथिवी अर्थात् पृथिवीरूपसे उपलक्षित नीचेका अण्डार्द्ध है; और जो सुवर्णमय खण्ड था वह द्यौः अर्थात् द्युलोकरूपसे उपलक्षित ऊपरका अण्डार्द्ध है। तथा दो खण्डोंमें विभक्त होनेके समय उस अण्डेका जो जरायु—स्थूल गर्भवेष्टन था वह पर्वतसमूह हुआ, जो उल्ब—सूक्ष्म गर्भवेष्टन था वह मेघोंके सहित नीहार—अवश्याय अर्थात् कुहंरा हुआ, जो उत्पन्न हुए उस गर्भके शरीरमें धमनियाँ—[रक्तवाहिनी] नाडियाँ थीं, वे नदियाँ हुईं और जो उसके वस्तिस्थान (मूत्राशय) में जल था, वह समुद्र हुआ ॥ २ ॥ |


अथ यत्तदजायत सोऽसावादित्यस्तं जायमानं घोषा उल्लूलवोऽनूदतिष्ठन्सर्वाणि च भूतानि सर्वे च कामास्तस्मात्तस्योदयं प्रति प्रत्यायनं प्रति घोषा उल्लूलवोऽनूत्तिष्ठन्ति सर्वाणि च भूतानि सर्वे च कामाः ॥३॥

फिर उससे जो उत्पन्न हुआ वह यह आदित्य है। उसके उत्पन्न होते ही बड़े जोरोंका शब्द हुआ तथा उसीसे सम्पूर्ण प्राणी