भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 355, कुल 978 में से

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पृष्ठ 355

खण्ड १९ ] शाङ्करभाष्यार्थ ३५१


| निम्रेडेरन्नुपनिम्रेडेरंश्च न केवल-<br>मागमनमात्रं घोषाणामुपसुखये-<br>युश्चोपसुखं च कुर्युस्त्यर्थः ।<br>द्विरभ्यासोऽध्यायपरिसमाप्त्यर्थ<br>आदरार्थश्च ॥ ४ ॥ | आते हैं और उसे सुख देते हैं, उसे<br>सुख देते हैं । तात्पर्य यह है कि<br>घोषोंका केवल आगमन ही नहीं<br>होता वे उसे सुख भी देते हैं, सुख<br>भी देते हैं । 'निम्रेडेरन्निम्रेडेरन्' यह<br>द्विरुक्ति अध्यायकी समाप्ति सूचित करने<br>और आदरप्रदर्शनके लिये है ॥४॥ |


इतिच्छान्दोग्योपनिषदि तृतीयाध्याय एकोन-<br> विंशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १९ ॥

—: ० :—

इति श्रीमद्गोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य<br> श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ छान्दोग्योपनिषद्विवरणे<br> तृतीयोऽध्यायः समाप्तः ॥ ३ ॥

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