भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 503

खण्ड ९ ] शाङ्करभाष्यार्थ ४९९


| कर्मणे । यत एवेत आगतोऽग्नेः सकाशाच्छ्रद्धाद्याहुतिक्रमेण, यतश्च पञ्चम्योऽग्निभ्यः संभूत उत्पन्नो भवति, तस्मा एवाग्नये हरन्ति स्वामेव योनिमग्निमापादयन्तीत्यर्थः ॥ २ ॥ | पुत्रगण अन्त्येष्टि कर्मके लिये अग्निके प्रति ले जाते हैं, जिस अग्निसे कि श्रद्धा आदि आहुतियोंके क्रमसे वह यहाँ आया था तथा जिन पाँच अग्नियोंसे वह उत्पन्न होता है, उस अग्निके प्रति ही वे इसे ले जाते हैं। तात्पर्य यह है कि उसे अपनी योनिभूत अग्निको ही प्राप्त करा देते हैं ॥ २ ॥ |


इतिच्छान्दोग्योपनिषदि पञ्चमाध्याये
नवमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ९ ॥