भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 547, कुल 978 में से

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पृष्ठ 547

खण्ड ११ ] शाङ्करभाष्यार्थ [ ५४३


| ते होचुः--येन हैवार्थेन प्रयोजनेन यं प्रति चरेद्गच्छेत्पुरुषस्तं हैवार्थं वदेत्, इदमेव प्रयोजनमागमनस्येत्ययं न्यायः सताम् । वयं च वैश्वानरज्ञानार्थिनः । आत्मानमेवेमं वैश्वानरं संप्रत्यध्येषि सम्यग्जानासि । अतस्तमेव नोऽस्मभ्यं ब्रूहि ॥६॥ | वे बोले-जिस अर्थ यानी प्रयोजनसे कोई पुरुष किसीके पास जाय उसे अपना वह प्रयोजन बतला देना चाहिये कि 'मेरे आनेका केवल यही प्रयोजन है।' सत्पुरुषोंका ऐसा ही नियम है । हमलोग भी वैश्वानरको जाननेकी इच्छावाले हैं । इस समय आप इस वैश्वानर आत्माको अच्छी तरह जानते हैं; अतः हमारे प्रति उसीका वर्णन कीजिये ॥ ६ ॥ |

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राजाके प्रति मुनियोंकी उपसत्ति

| इत्युक्तः-- | इस प्रकार कहे जानेपर— |

तान्होवाच प्रातर्वः प्रतिवक्तास्मीति ते ह समित्पाणयः पूर्वाह्णे प्रतिचक्रमिरे तान्हानुपनीयैवैतदुवाच ॥७॥

वह उनसे बोला—'अच्छा, मैं प्रातःकाल आपलोगोंको इसका उत्तर दूँगा।' तब दूसरे दिन वे पूर्वाह्णमें हाथमें समिधाएँ लेकर राजाके पास गये । उनका उपनयन न करके ही राजाने उस विद्याका उपदेश किया ॥ ७ ॥

| तान्होवाच--प्रातर्वो युष्मभ्यं प्रतिवक्तास्मि प्रतिवाक्यं दातास्मीत्युक्तास्ते ह राज्ञोऽभिप्रायज्ञाः समित्पाणयः समिद्भारहस्ता अपरेद्युः पूर्वाह्णे राजानं प्रतिचक्रमिरे गतवन्तः। | वह उनसे बोला--'मैं आप लोगोंको इसका उत्तर प्रातःकाल दूँगा।' इस प्रकार कहे जानेपर राजाके अभिप्रायको जाननेवाले वे मुनिगण दूसरे दिन पूर्वाह्नमें समित्पाणि--हाथोंमें समिधाएँ लिये राजाके पास आये । |