भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 702, कुल 978 में से

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पृष्ठ 702

षोडश खण्ड

—: ० :—

चोरके तप्त परशुग्रहणके दृष्टान्तद्वारा उपदेश

| शृणु यथा— | सुन, जिस प्रकार— |

पुरुषँ सोम्योत हस्तगृहीतमानयन्त्यपहार्षीत्स्तेय-
मकार्षीत्परशुमस्मै तपतेति स यदि तस्य कर्ता भवति
तत एवानृतमात्मानं कुरुते सोऽनृताभिसन्धोऽनृते-
नात्मानमन्तर्धाय परशुं तप्तं प्रतिगृह्णाति स दह्यतेऽथ
हन्यते ॥ १ ॥

हे सोम्य ! [ राजकर्मचारी ] किसी पुरुषको हाथ बाँधकर लाते हैं [ और कहते हैं— ] 'इसने धनका अपहरण किया है, चोरी की है इसके लिये परशु तपाओ।' वह यदि उसका (चोरीका) करनेवाला होता है तो अपनेको मिथ्यावादी प्रमाणित करता है। वह मिथ्याभिनिवेशवाला पुरुष अपनेको मिथ्यासे छिपाता हुआ तपे हुए परशुको ग्रहण करता है; किंतु वह उससे दग्ध होता है और मारा जाता है ॥ १ ॥

| सोम्य पुरुषं चौर्यकर्मणि संदिह्यमानं निग्रहाय परीक्षणाय वोतापि हस्तगृहीतं बद्धहस्तमानयन्ति राजपुरुषाः । किं कृतवानयमिति पृष्टाश्चाहुरपहार्षीद्धनमस्यायम् । ते चाहुः किमपहरणमात्रेण बन्धनमर्हति ? | हे सोम्य ! जिस पुरुषके विषयमें चोरी करनेका संदेह होता है उसे राजकर्मचारी दण्ड देने अथवा उसकी परीक्षा करनेके लिये 'हस्त-गृहीत'—हाथ बाँधकर लाते हैं। 'इसने क्या किया है ?' इस प्रकार पूछे जानेपर वे कहते हैं कि 'इसने इस पुरुषका धन लिया है।' तब वे (न्यायाधीश) कहते हैं 'क्या धन लेनेमात्रसे यह बन्धनके योग्य हो गया; तब तो अन्य किसी प्रकार |