भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 701

खण्ड १५ ] शाङ्करभाष्य ६९७


| स य इत्यादि समानम् ।<br><br>यदि मरिष्यतो मुमुक्षतश्च तुल्या सत्सम्पत्तिस्तत्र विद्वान्सत्सम्पन्नो नावर्तत आवर्तते त्वविद्वानित्यत्र कारणं दृष्टान्तेन भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति। तथा सोम्येति होवाच॥ ३ । | ‘स यः’ इत्यादि श्रुतिका अर्थ पूर्ववत् है। ‘यदि मरनेवाले और मुमुक्षुकी सत्सम्पत्ति एक-जैसी है तो विद्वान् तो सत्‌को प्राप्त होकर नहीं लौटता और अविद्वान् लौटता है—इसमें जो कारण है उसे हे भगवन् ! दृष्टान्तद्वारा मुझे फिर समझाइये’ [ —ऐसा श्वेतकेतुने कहा ] । तब आरुणिने कहा—‘सौम्य ! अच्छा’ ॥ ३ ॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये पञ्चदशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १५ ॥