छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 758, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ें| ७५४ | छान्दोग्योपनिषद् | [ अध्याय ७ |
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'यह ब्रह्म है' ऐसी उपासना करता है। [ नारद—] 'भगवान् ! क्या जलसे भी श्रेष्ठ कुछ है ?' [ सनत्कुमार—] 'जलसे श्रेष्ठ भी है ही।' [ नारद—] 'भगवान् मुझे उसीका उपदेश करें' ॥ २ ॥
| फलं स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्त आप्नोति सर्वान्कामान्काम्यान्मूर्तिमतो विषयान्नित्यर्थः । अप्संभवत्वाच्च तृप्तेरम्बुपासनात्तृप्तिमांश्च भवति । समानमन्यत् ॥ २ ॥ | [ इस उपासनाका ] फल—वह जो कि 'जल ब्रह्म है' ऐसी उपासना करता है सम्पूर्ण कामनाओंको—काम्य वस्तुओंको अर्थात् मूर्तिमान् विषयोंको प्राप्त कर लेता है। तथा तृप्ति भी जलजनित होनेके कारण जलकी उपासना करनेसे वह तृप्तिमान् होता है। शेष सब पूर्ववत् है ॥२॥ |
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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि सप्तमाध्याये दशमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १० ॥