छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| अथ य एतदेवम् | ५ | २४ | २ | ५७० |
| अथ य एतदेवं विद्वान् | १ | ७ | ७ | १०३ |
| अथ य एष सम्प्रसादः | ८ | ३ | ४ | ८३१ |
| अथ य एषोऽन्तराक्षिणि | १ | ७ | ५ | १०० |
| अथ यच्चतुर्थममृतम् | ३ | ९ | १ | २६८ |
| अथ यत्तदजायत | ३ | १९ | ३ | ३४८ |
| अथ यत्तपो दानम् | ३ | १७ | ४ | ३३१ |
| अथ यत्तृतीयममृतम् | ३ | ८ | १ | २६४ |
| अथ यत्पञ्चमममृतम् | ३ | १० | १ | २७० |
| अथ यत्प्रथमास्तमिते | २ | ९ | ८ | १७९ |
| अथ यत्प्रथमोदिते | २ | ९ | ३ | १७५ |
| अथ यत्रैतत्पुरुषः | ६ | ८ | ५ | ६५४ |
| अथ यत्रैतदबलिमानम् | ८ | ६ | ४ | ८६० |
| अथ यत्रैतदस्माच्छरीराद् | ८ | ६ | ५ | ८६१ |
| अथ यत्रैतदाकाशम् | ८ | १२ | ४ | ९३१ |
| अथ यत्रोपाकृते | ४ | १६ | ४ | ४३२ |
| अथ यत्सङ्गववेलायाम् | २ | ९ | ४ | १७६ |
| अथ यत्सम्प्रति मध्यन्दिने | २ | ९ | ५ | १७७ |
| अथ यत्सत्त्रायणमित्याचक्षते | ८ | ५ | २ | ८४३ |
| अथ यदतः परो दिवः | ३ | १३ | ७ | २९८ |
| अथ यदनाशकायनमित्याचक्षते | ८ | ५ | ३ | ८४४ |
| अथ यदवोचं भुवः | ३ | १५ | ६ | ३२१ |
| अथ यदवोचं भूः | ३ | १५ | ५ | ३२० |
| अथ यदवोचं स्वः | ३ | १५ | ७ | ३२१ |
| अथ यदश्नाति | ३ | १७ | २ | ३३० |
| अथ यदास्य वाङ्मनसि | ६ | १५ | २ | ६९५ |
| अथ यदि गन्धमाल्यलोककामः | ८ | २ | ६ | ८२३ |
| अथ यदि गीतवादित्रलोककामः | ८ | २ | ८ | ८२३ |
| अथ यदि तस्याकर्ता | ६ | १६ | २ | ७०० |
| अथ यदिदमस्मिन्ब्रह्मपुरे | ८ | १ | १ | ८०५ |
| अथ यदि भ्रातृलोककामः | ८ | २ | ३ | ८२२ |
| अथ यदि महज्जिगमिषेद् | ५ | २ | ४ | ४६४ |