छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | पृष्ठ | ||
|---|---|---|---|---|---|
| अथ योऽस्य प्रत्यङ् सुषिः | ... | ३ | १३ | ३ | २९३ |
| अथ योऽस्योदङ् सुषिः | ... | ३ | १३ | ४ | २९४ |
| अथ योऽस्योर्ध्वः सुषिः | .... | ३ | १३ | ५ | २९५ |
| अथ सप्तविधस्य वाचि | ... | २ | ८ | १ | १७० |
| अथ ह हँसा निशायाम् | .... | ४ | १ | २ | ३५४ |
| अथ ह चक्षुरुद्गीथम् | .... | १ | २ | ४ | ५२ |
| अथ ह प्राण उच्चिक्रमिषन् | .... | ५ | १ | १२ | ४५१ |
| अथ ह प्राणा अहँश्रेयसि | .... | ५ | १ | ६ | ४४६ |
| अथ ह मन उद्गीथम् | .... | १ | २ | ६ | ५३ |
| अथ ह य एतानेवम् | ... | ५ | १० | १० | ५३५ |
| अथ ह य एवायं मुख्यः | .... | १ | २ | ७ | ५४ |
| अथ ह वाचमुद्गीथम् | .... | १ | २ | ३ | ५२ |
| अथ ह शौनकं च | ... | ४ | ३ | ५ | ३७२ |
| अथ ह श्रोत्रमुद्गीथम् | .... | १ | २ | ५ | ५३ |
| अथ हाग्नयः समूदिरे | ... | ४ | १० | ४ | ४०३ |
| अथ हेन्द्रोऽप्राप्यैव | .... | ८ | ९ | १ | ८८७ |
| अथ हैनँ गार्हपत्यः | .... | ४ | ११ | १ | ४०९ |
| अथ हैनँ प्रतिहर्तोपससाद | .... | १ | ११ | ८ | १३६ |
| अथ हैनँ प्रस्तोतोपससाद | .... | १ | ११ | ४ | १३३ |
| अथ हैनँ यजमान उवाच | .... | १ | ११ | १ | १३१ |
| अथ हैनँ वागुवाच | ... | ५ | १ | १३ | ४५२ |
| अथ हैनँ श्रोत्रमुवाच | ... | ५ | १ | १४ | ४५२ |
| अथ हैनमन्वाहार्यपचनः | .... | ४ | १२ | १ | ४१२ |
| अथ हैनमाहवनीयः | ... | ४ | १३ | १ | ४१४ |
| अथ हैनमुद्गातोपससाद | .... | १ | ११ | ६ | १३५ |
| अथ हैनमृषभोऽभ्युवाद | ... | ४ | ५ | १ | ३८६ |
| अथ होवाच जनशाँर्कराक्ष्य | .... | ५ | १५ | १ | ५५३ |
| अथ होवाच बुडिलमाश्वतराश्विम् | .... | ५ | १६ | १ | ५५५ |
| अथ होवाच सत्ययज्ञम् | ... | ५ | १३ | १ | ५४९ |
| अथ होवाचेन्द्रद्युम्नम् | ... | ५ | १४ | १ | ५५१ |
| अथ होवाचोद्दालकम् | ... | ५ | १७ | १ | ५५७ |
| अथात आत्मादेश एव | .... | ७ | २५ | २ | ७९४ |