चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[अ० २५ ] सूत्रस्थानम् २८१
शीत, उष्ण, स्निग्ध, रूक्ष, मन्द, तीक्ष्ण, स्थिर, सर, मृदु, कठिन, विशद, पिच्छिल श्लक्ष्ण, खर, सूक्ष्म, स्थूल, सान्द्र, द्रव भेद से । द्रव्य (शूकधान्यादि), संयोग (खाद्य पदार्थों का मिश्रण), करण (संस्कार) भेद से आहार-द्रव्य असंख्य प्रकार का हो जाता है ॥ ३४-३६ ॥ तस्य खलु ये ये विकारावयवा भूयिष्ठमुपयुज्यन्ते, भूयिष्ठकल्पानां च मनुष्याणां प्रकृत्यैव हिततमाश्चाहिततमाश्च, तांस्तान्यथावदनु- व्याख्यास्यामः ॥ (१) तद्यथा-लोहितशालयः शूकधान्यानां पथ्यतमत्वे श्रेष्ठतमा भवन्ति, मुद्गाः शमीधान्यानां, आन्तरिक्षमुदकानां, सैन्धवं लवणानां, जीवन्ती- शाकं शाकानां, ऐणेयं मृगमांसानां, लावः पक्षिणां, गोधा बिलेशयानां, रोहितो मत्स्यानां, गव्यं सर्पिषां, गोक्षीरं क्षीराणां, तिलतैलं स्थावरजा- तानां स्नेहानां, वराहवसा आनूपमृगवसानां, चुलुकीवसा मत्स्यवसानां, पाकहंसवसा जलचरविहङ्गवसानां, कुक्कुटवसा विष्किरशकुनिवसानां, अजमोदः शाखादममेदसां, शृङ्गवेरं कन्दानां, मृद्वीका फलानां, शर्करा इक्षुविकाराणामिति प्रकृत्यैव हिततमानामाहारविकाराणां प्राधान्यतो द्रव्याणि व्याख्यातानि भवन्ति ॥ (२) प्रायः करके जो जो आहार पदार्थ हितकारी और अहितकारी कहे जाते हैं और बहुत अधिक व्यवहार में आते हैं, उन पदार्थों का यहां वर्णन करते हैं। जैसे—लाल चावल शूकधान्यों में सबसे अधिक हितकारी (श्रेष्ठ) है। मूंग शमीधान्यों में, बरसात का पानी सब पानियों में, सेंधा नमक सब नमकों में, जीवन्ती का शाक सब शाकों में, मृग का मांस सब पशुओं के मांसों में, बटेर सब पक्षियों में, गोधा (गोह) बिल में रहने वाले जन्तुओं में, रोहित मत्स्य सब मछलियों में, गौ का घी सब घी में, गाय का दूध सब दूधों में, तिल का तेल स्थावरजन्य सब स्नेहों में, वराह की चर्बी सब जलचर प्राणियों की चर्बियों में, चुलुकी (शुशु) मछली की चर्बी सब मछलियों की चर्बियों में, सफेद हंस की वसा सब जलचर पक्षियों की वसा में, मुर्गे की चर्बी बिखेर कर खाने वाले सब पक्षियों में, बकरी का मेद शाखा या टहनी खाने वाले पशुओं की मेदों में, अदरख सब कन्दों अर्थात् भूमि में रहने वाले फलों में, किशमिश सब फलों में, शकर गन्ने के रस से बनी सब बस्तुओं में श्रेष्ठ है। ये भोज्य पदार्थों में स्वभाव से हितकारी द्रव्य कह दिये हैं ॥ अत ऊर्ध्वमहितानुपदेक्ष्यामः-यवकाः शूकधान्यानामपथ्यतमे