चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअ० २७ ] सूत्रस्थानम् ३४५ लिये रुचिकर कफपित्त का अविरोधी (प्रकोपक नहीं) रूक्ष है। मीठा अनार पित्तनाशक है इन सब में खट्टा अनार श्रेष्ठ है। वृक्षाम्ल (कोकम) संग्राही, रूक्ष, उष्ण, वात-कफ में प्रशस्त है। अम्लिका (इमली) का फल पकने पर लगभग कोकम के समान गुणवाला होता है। अम्लवेतस का गुण भी इसी प्रकार है, परन्तु रेचक है। मातुलुंग (बिजौरे निम्बू) का केशर शूल, अरुचि, विबन्ध, मन्दाग्नि, मदात्यय, हिक्का, कास, श्वास, वमन, मल सम्बन्धी रोगों में और तथा वातकफ-जन्य रोगों में प्रशस्त और लघु है। इसकी छाल, गिरी आदि गुरु और वात-प्रकोपक है। बिना छाल का खजूर रोचक, अग्निदीपक, हृदय के लिये हितकारी, सुगन्धित, कफ-वातनाशक, श्वास, हिचकी और अर्श रोग में हितकारी है। नारंगी का फल—मधुर, कुछ खट्टा, हृद्य, खाने में रुचिकर, पचने में दुर्जर, वातनाशक और गुरु है। बादाम, अभिषुक् (पिस्ता), अखरोट, मकूकक, निकोच, गुरु, उष्ण स्निग्ध, मधुर, शक्तिवर्धक, वायुनाशक, पुष्टिदायक और कफ-पित्त को बढ़ाने वाला है। इनमें पियाल के गुण भी इसी के समान हैं, परन्तु वह उष्ण नहीं है। श्लेष्मातक (लसूड़े) का फल कफकारक, मधुर, शीतल, गुरु है। अंकोटक का फल कफकारक, गुरु, विष्टं भी और अग्निनाशक है। शमी (जंडी) का फल गुरु, उष्ण, मधुर, शीतल और बालों का नाश- कारक है। करंज का फल विष्टम्भी और वात-कफ के लिये अविरोधी है। आम्रातक, दन्तशठ (निम्बू, खट्टा), करौंदा और ऐरावत ये रक्त- पित्तनाशक हैं। वार्त्ताक, वातनाशक, अग्निदीपक, कटुतिक्त रस है। पित्तपापडे का फल वायुकारक और कफ-पित्तनाशक है। आखिकी-फल पित्त-कफनाशक, खट्टा और वायुकारक है। पीपल, गूलर, पिलखन, बड़ इनके फल पकने पर मधुर और वात-पित्तनाशक हैं। कच्चे फल कषाय मधुर, अम्ल, वायुकारक और गुरु हैं। भिलावे का फल अग्नि के समान (छाले डालने वाला) है, भिलावे की छाल, मज्जा स्वादु, शीतल है। इस प्रकार से उपयोगी पांचवां फलवर्ग भी कह दिया है ॥ १२३-१६३ ॥ इति फलवर्गः ।
अथ हरितवर्गः । रोचनं दीपनं हृद्यमार्द्रकं विश्वभेषजम् । वातश्लेष्मविबन्धेषु रसस्तस्योपदिश्यते ॥ १६४ ॥