चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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शब्द और 'एलोपैथी' ये दोनों शब्द ही भिन्न हैं, और इनके अर्थों में तो जमीन और आसमान का अन्तर है। इतनाही नहीं अपितु छत्तीस का सम्बन्ध है। फिर दोनों कैसे एक हो सकते हैं। इसलिये इस प्रकार को मिलाकर पुस्तकें लिखना-प्राचीन ग्रन्थों के प्रति न्याय मैं नहीं समझता। साथ ही आधुनिक विज्ञान प्रति दिन उन्नति पर है, आज से पच्चीस साल के पहले के सिद्धान्त-आज बहुत कुछ बदल गये; आज के सिद्धान्त-कल नहीं बदलेंगें यह कोई नहीं कह सकता। ऐसी अवस्था में इन पुस्तकों में केवल अग्रेंजी पुस्तकों का उलथा देना युक्तिसंगत मैं नहीं समझता ! इन सब बातों का विचार करके मैंने आयुर्वेद के दृष्टिकोण का विचार करते हुए विद्यार्थियों की दृष्टि से, उनकी रुचि के अनुसार यह अनुवाद किया है। यह अनुवाद आज से बीस साल पहले का है, इस संस्करण में भी इसकी पुनरावृत्ति नहीं कर सकता केवल कुछ थोड़े से स्थानों को छोड़कर। क्योंकि संस्करण बहुत दिनों से समाप्त था विद्यार्थियों की मांग थी। इसलिये इसको प्रकाशित करना जल्दी थी। प्रथम प्रकाशक-श्री आर्यसाहित्य मण्डल लिमिटेड अजमेर वालों को कई बार इसके लिये कहा-परन्तु लड़ाई के कारण तथा अन्य असुविधा के कारण वे इसका प्रकाशन नहीं कर सके। कानून के अनुसार पब्लिशर बनने का या पब्लिश करने का सबको अधिकार नहीं। इसके सिवाय कागज की असुविधा। इसलिये मुझे किसी ऐसे पब्लिशर की इच्छा थी जो इस समय इन असुविधाओं में भी इसका प्रकाशन शीघ्र कर दे। श्रीकैलाशनाथजी भार्गव अमर मालिक भार्गव पुस्तकालय काशी वाले से पत्र व्यवहार हुआ और अब तो उन्होंने इसको छापना भी स्वीकार किया जिसका फल यह है कि इस समय में कागज कम्पोजिटर आदि की कठिनाई होते हुए भी यह छप सका। इसके लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं। अग्रिम संस्करण में सम्भव हुआ तो इसकी पुनरावृत्ति हो सकेगी। आशा है कि जिस प्रकार वैद्य समाज ने, विद्यार्थियों ने इसकी पहला संस्करण अपनाया था उसी प्रकार इसका यह भी दूसरा संस्करण अपनायेंगे। इति शम्
$\left.{l} गुरुकुल कांगड़ी १-७-४८ \right}$ \hspace{2cm} अत्रिदेवगुप्त