भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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चरक-संहिता विषय-सूची सूत्रस्थानम् प्रथमोऽध्यायः (पृ० १-२६) दीर्घञ्जीवितीयः-ऋषिभरद्वाज का इन्द्र के पास गमन। रोगों का प्रादुर्भाव। ऋषियों की सभा, रोग शान्ति के उपाय पर विचार। इन्द्र के पास जाने के लिये भरद्वाज का निश्चय। भरद्वाज का इन्द्र से त्रिस्कन्ध आयुर्वेद का ग्रहण। भरद्वाज से ऋषियों का आयुर्वेद-अध्ययन। आत्रेय पुनर्वसु का छः शिष्यों को उपदेश। प्रथम तन्त्र-प्रणेता अग्निवेश। भेल आदि अन्य तन्त्रकार। आयुर्वेद का लक्षण। आयु का लक्षण आयु के पर्यायवाची शब्द। सामान्य और विशेष। आयुर्वेद के प्रकाश करने का प्रयोजन। द्रव्य। गुण। इन्द्रियों के अर्थ। कर्म। समवाय। द्रव्य का लक्षण। गुणों का लक्षण। कर्म का लक्षण। सामान्य आदि छः कारण उनके कार्य धातुओं के विषम होने का कारण। सुख दुःखों का आश्रय आत्मा का स्वरूप। रोगप्रकृति। रोगों का प्रतीकार और उनके भेद। वायु का लक्षण पित्त का लक्षण कफ का लक्षण। साध्य रोगों की शान्ति रसों की उत्पत्ति। रसों द्वारा दोषों की शान्ति। द्रव्य के भेद। जंगम द्रव्य भौम द्रव्य। औद्भिद् द्रव्य के चार भेद उनके अंग। मूलिनी वनस्पतियां उनकी गणना इनके कर्म। फलिनी वनस्पतियां इनके कर्म। चार प्रकार के स्नेह इनके कर्म आठ प्रकार के मूत्र। मूत्रों के सामान्य गुण। आठ प्रकार के दूध उनके सामान्य गुण। दूध के कर्म। दूध वाले वृक्ष उनके गुण। उपसंहार। औषधि ज्ञान का प्रयोजन, न जानी हुई औषधियों से हानियां। वैद्य के कर्तव्य। अध्याय संग्रह। द्वितीयोऽध्यायः (पृ० २६-३७) अपामार्गतण्डुलीयः-शिरोविरेचनोपयोगी द्रव्य। वमनकारक द्रव्य। विरेचन द्रव्य। आस्थापन और अनुवासन के द्रव्य। मात्रा और काल के विचार की आवश्यकता। रोगियों के लिये विशेष आहार द्रव्य, यवागू और विलेपीपाक। उपसंहार। तृतीयोऽध्यायः (पृ० ३७-४५) आरग्वधीयः-त्वक्-रोगोंपर ३२ योगों का वर्णन