भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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( गिलोय ), हीबेर ( नेत्रबाला ), धान्यक ( धनिया ), पटोल ( परबल ) ये दस औषधियां 'तृष्णानिग्रहण' अर्थात् प्यास को रोकने वाली हैं ॥ शटी-पुष्करमूल-बदरबीज-कण्टकारिका-बृहती-वृक्षरूहाभया-पिप्पली- दुरालभा-कुलीरशृङ्गन्य इति दशेमानि हिक्कानिग्रहणानि भवन्ति ॥(३०)॥ इति त्रिकः कषायवर्गः ॥ [ ६ ] ॥ शटी ( कचूर ), पुष्करमूल ( पोहकरमूल ), बदरबीज ( बेर के बीज, गुटली ), कण्टकारिका ( छोटी कटेरी ), बृहती ( बड़ी कटेरी ), वृक्षरूहा ( बन्दा, यह एक पेड़ पर ही पौधा उत्पन्न हो जाता है ) अभया ( जंगी हरड़ ), पिप्पली, दुरालभा ( धमासा ), कुलीरशृंगी ( काकड़ा सींगी ) ये दस 'हिक्का- निग्रहण' अर्थात् हिचकी को शमन करती हैं ॥ यह तीन से बना हुआ कषाय वर्ग है । प्रियङ्गवनन्ताम्रास्थि-कट्वङ्ग-लोध्र-मोचरस-समङ्गा-धातकीपुष्प- पद्मा-पद्मकेशराणीति दशेमानि पुरीषसंग्रहणीयानि भवन्ति ॥ (३१) ॥ प्रियंगु ( फूल प्रियंगु ), अनन्ता ( अनन्तमूल ), आम्रास्थि ( आम की गुठली ), कट्वंग ( श्योनाक की छाल ), लोध्र (पटानी लोध), मोचरस ( सिम्बल का गोंद ), समंगा ( मंजीठ ), धातकी पुष्प ( धाय के फूल ), पद्मा ( भार्गी ), पद्मकेशर (कमल का केशर), यह दस 'पुरीषसंग्रहण' अर्थात् मल को रोकनेवाले हैं॥ जम्बू-शल्लकीत्वक्कच्छुरा-मधुक-शाल्मली-श्रीवेष्टक-भृष्टमृत्पयस्योत्पल- तिलकणा इति दशेमानि पुरीषविरजनीयानि भवन्ति ॥ ( ३२ ) ॥ जम्बु ( जामुन ), शल्लकीत्वक् ( कुन्दुरु की छाल ), कच्छुरा ( कौंच या धमासा ), मधुक ( मुलेहठी ), शाल्मली (सिम्बल का गोंद), श्रीवेष्टक (बिरौजा) भृष्टमृत् ( अग्नि के जलाने से जली हुई मिट्टी, चूल्हे की मिट्टी ), पयस्या ( बिदारी कन्द ), उत्पल ( नील कमल ), तिल कण ये दस 'पुरीषविरजनीय' अर्थात् मल के दूषित रंग को बदलने वाले हैं ॥ जम्बवाम्र-प्लक्ष-वट-कपीतनोदुम्बराश्वत्थ-भल्लातकाश्मन्तक-सोम- वल्का इति दशेमानि मूत्रसंग्रहणीयानि भवन्ति ॥ ( ३३ ) ॥ जम्बु ( जामुन ), आम्र (आम), प्लक्ष ( पिलखन ), वट ( बड़ ), कपीतन (पारस पीपल), उदुम्बर (गूलर), अश्वत्थ (पीपल), भल्लातक (भिलावा), अश्म- न्तक, सोमवल्क (खैर सफेद) ये दस 'मूत्र-संग्रहण' अर्थात् मूत्र कोकम करते हैं॥ पद्मोत्पल-नलिन-कुमुद-सौगन्धिक-पुण्डरीक-शतपत्र-मधुक-प्रियङ्ग- धातकीपुष्पाणीति दशेमानि मूत्रविरजनीयानि भवन्ति ॥ ( ३४ ) ॥