भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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पृष्ठ 77

अ० ४ ] सूत्रस्थानम् ५६ ( पीतसाल ), अरिमेद (१विट्खदिर इरिमेद), ये दस 'उदर्द' अर्थात् शीतपित्त रोग को शान्त करते हैं ॥ विदारीगन्धा-पृश्निपर्णी-बृहती-कण्टकारिकैरण्ड-काकोली-चन्दनो- शीरैला-मधुकानीति दशेमान्यङ्गमर्दप्रशमनानि भवन्ति ॥ (४४) ॥ विदारीगन्धा ( शालपर्णी ), पृश्निपर्णी ( पिठवन ), बृहती ( बड़ी कटेरी ) कण्टकारिका ( छोटी कटेरी ) एरण्ड, काकोली, चन्दन ( लाल चन्दन ), उशीर ( खस ), एला, ( छोटी इलायची ), मधुक ( मुलहटी ), ये दस 'अंगमर्द-प्रश- मन' अर्थात् अंगों के टूटने की बेचैनी को मिटाते हैं ॥ पिप्पली-पिप्पलीमूल-चव्य-चित्रक-शृङ्गवेर-मरिचाजमोदाजगन्धाजा- जी-गण्डीराणीति दशेमानि शूलप्रशमनानि भवन्ति ॥ (४५) ॥ इति पञ्चकः कषायवर्गः ॥ [ ६ ] ॥ पिप्पली, पिप्पली-मूल, चव्य ( चविका ), चित्रक ( चातामूल ), शृङ्गवेर (सांठ), मरिच, अजमोदा (अजवायन), अजगन्धा (हूल्हू), अजाजी ( जीरा ), गंडीर ये दस 'शूलप्रशमन' अर्थात् तीव्र पीड़ा के नाशक हैं ॥ यह पांच का एक 'कषाय वर्ग' होता है । मधु-मधुक-रुधिर-मोचरस-मृत्कपाल-लोध्र-गैरिक-प्रियङ्गु-शर्करा-लाजा इति दशेमानि शोणित-स्थापनानि भवन्ति ॥ (४६) ॥ मधु ( शहद ), मधुक ( मुलैहटी ), रुधिर ( केशर ), मोचरस ( सिम्बल का गोंद ), मृत्कपाल ( मिट्टी का ठींकरा ), लोध्र ( पठानी लोध), गैरिक (गेरू), प्रियंगु (फूल प्रियंगु), शर्करा (मिश्री), लाजा ( खीलें ) ये दश 'शोणित-स्थापन' अर्थात् रक्ताधिक वा बहते खून को रोकने वाले हैं ॥ शाल-कट्फल-कदम्ब -पद्मक-तुङ्ग-मोचरस-शिरीष-वञ्जुलैलवालुका- शोका इति दशेमानि वेदनास्थापनानि भवन्ति ॥ (४७) ॥ शाल ( साल ), कट्फल (कायफल), कदम्ब, पद्मक (पद्माख), तुंग२ (नाग केशर ) मोचरस ( सिम्बल का गोंद ), शिरीष ( सिरस ), वंजुल ( जलवेतस ), एलवालुक, अशोक ये दस 'वेदनास्थापन' अर्थात् तीव्र वेदना को कम करते हैं ॥ हिङ्गु-कैडर्यारिमेद-वचा-चोरक-वयःस्था-गोलोमी-जटिला-पलङ्कषाशो- करोहिण्य इति दशेमानि संज्ञास्थापनानि भवन्ति ॥ (४८) ॥ हिंगु ( हींग ), कैडर्य ( नीम ). अरिमेद ( रेवां ), वच, चोरक, वयस्था १. विट्खदिर—इस खैर से बदबू आती है । २ तुङ्ग के स्थान पर तुम्ब पाठ होने पर तेजवल लेना चाहिये !