धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
DevanagariHindipublished213 पृष्ठ
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नमो तस्स भगवतो अरहतोसम्मासम्बुद्धस्स धम्मपदं १—यमकवग्गो स्थान—श्रावस्ती व्यक्ति—चक्खुपाल (थेर) १-मनोपुब्बङ्गमा धम्मा मनोसेट्ठा मनोमया । मनसा चे पदुट्ठेन भासति वा करोति वा । ततो 'नं दुक्खमन्वेति चक्कं 'व वहतो पदं ॥ १॥ (मनःपूर्वङ्गमा धर्मा मनःश्रेष्ठा मनोमया मनसा चेत्प्रदुष्टेन भाषते वा करोति वा । तत एनं दुःखमन्वेति चक्रमिव वहतः पदम् ॥१॥ ) अनुवाद—सभी धर्मों (=कायिक, वाचिक, मानसिक कर्मों, या सुख दुःख आदि अनुभवों) का मन अग्रगामी है, मन (उनका) प्रधान है, (कर्म) मनोमय हैं। जब (कोई) सदोष मनसे (बात) बोलता है, या (काम) करता है, तो