भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 17, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 17

६ ] धम्मपदं [ १।१४ अनुवाद—जो असारको सार समझते हैं, और सारको असार; वह झूठे संकल्पोंमें सलग्न (पुरुष) सारको नहीं प्राप्त करते हैं। १२—सारञ्च च सारतो ञत्वा असारञ्च असारतो । ते सारं अधिगच्छन्ति सम्मासङ्कप्पगोचरा ॥१२॥ (सारं च सारतो ज्ञात्वा, असारं च असारतः । ते सारं अधिगच्छन्ति सम्यक्-सङ्कल्प-गोचराः ॥ १२ ॥ ) अनुवाद—जो सारको सार जानते हैं, और असार को असार; वह सच्चे सङ्कल्पमें संलग्न (पुरुष) सारको प्राप्त करते हैं। श्रावस्ती (जेतवन) नन्द (थेर) १३-यथागारं दुच्छन्नं वुट्ठी समतिविज्झति । एवं अभावितं चित्तं रागो समतिविज्झति ॥१३॥ (यथागारं दुश्छन्नं वृष्टिः समतिविध्यति । एवं अभावितं चित्तं रागः समतिविध्यति ॥१३॥ ) अनुवाद—जैसे ठीकसे न छाये घरमें वृष्टि घुस जाती है। वैसे ही अभावित ( = न संयम किये) चित्तमें राग घुस जाता है। १४-यथागारं सुच्छन्नं वुट्ठी न समतिविज्झति । एवं सुभावितं चित्तं रागो न समतिविज्झति ॥ १४॥ (यथागारं सुच्छन्नं वृष्टिर्न समतिविध्यति । एवं सुभावितं चित्तं रागो न समतिविध्यति ॥ १४॥ ) अनुवाद—जैसे ठीकसे छाये घरमें वृष्टि नहीं घुसती, वैसे ही सुभावित चित्तमें राग नहीं घुसता ।