धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१।११ ] यमकवग्गो [ ५ सावत्थी ( जेतवन ) देवदत्त ९-अनिक्कसावो कासावं यो वत्थं परिदहेस्सति । अपेतो दमसच्चेन न स कासावमरहति ॥६॥ ( अनिष्कषायः काषायं यो वस्त्रं परिधास्यति । अपेतो दमसत्याभ्यां न स काषायमर्हति ॥ ९॥ ) अनुवाद—जो ( पुरुष ) ( राग, द्वेष आदि ) कषायों (=मलों ) को बिना छोड़े काषाय वस्त्रको धारण करेगा, वह संयम- सत्यसे परे हटा हुआ (है), और (वह) काषाय (धारण) करनेका अधिकारी नहीं है। १०-यो च वन्तकसावस्स सीलेसु सुसमाहितो । उपेतो दमसच्चेन स वे कासावमरहति ॥१०॥ ( यश्च वान्तकषायः स्यात् शीलेषु सुसमाहितः । उपेतो दम-सत्याभ्यां स वै काषायमर्हति ॥ १०॥ ) अनुवाद—जिसने कषायोंको वमन कर दिया है, जो आचार (=शील) से सुसम्पन्न, तथा संयम-सत्यसे सयुक्त है, वही काषाय (वस्त्र) का अधिकारी है। राजगृह ( वेणुवन ) संजय ११-असारे सारमतिनो सारे चासारदस्सिनो । ते सारं नाधिगच्छन्ति मिच्छासङ्कप्पगोचरा ॥११॥ ( असारे सारमतयः सारे चासारदर्शिनः । ते सारं नाधिगच्छन्ति मिथ्यासङ्कल्पगोचराः ॥ ११॥ )