धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६।११ ] पण्डितवग्गो [ ३९ ( नात्महेतोः न परस्य हेतोः न पुत्रमिच्छेत् न धनं न राष्ट्रम् । नेच्छेद् अधर्मेण समृद्धिमात्मनः स शीलवान् प्रज्ञावान् धार्मिकः स्यात् ॥९॥ ) अनुवाद—जो अपने लिए या दूसरेके लिये पुत्र, धन, और राज्य नहीं चाहते, न अधर्मसे अपनी उन्नति चाहते हैं; वही सदाचारी ( शीलवान् ) प्रज्ञावान और धार्मिक हैं । जेतवन धर्मश्रवण ८५—अप्पका ते मनुस्सेसु ये जना पारगामिनो । अथायं इतरा पजा तीरमेवानुधावति ॥१०॥ ( अल्पकास्ते मनुष्येषु ये जनाः पारगामिनः । अथेमा इतराः प्रजाः तीरमेवानुधावति ॥१०॥ ) ८६—ये च खो सम्मदक्खाते धम्मे धम्मानुवत्तिनो । ते जना पारमेस्सन्ति मच्चुधेय्यं सुदुत्तरं ॥११॥ ( ये च खलु सम्यगाख्याते धर्मे धर्मानुवर्तिनः । ते जनाः पारमेष्यन्ति मृत्युधेयं सुदुस्तरम् ॥११॥ ) अनुवाद—मनुष्योंमें पार जानेवाले जन विरले ही हैं, यह दूसरे लोग तो तीरे ही तीरे दौड़नेवाले हैं। जो सुव्याख्यात धर्म- का अनुगमन करते हैं, वह मृत्युगृहीत अतिदुस्तर (संसार- सागर) को पार करेंगे।