भारतकोश
धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

Dhanurveda Samhita of Maharshi Vasishtha with Commentary

महर्षि वसिष्ठ (टीकाकार: स्वामी हरिदयालु जी महाराज) द्वारा

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भूमिका समर्पण कर दिया। पाठकगण! यह ‘वासिष्ठी धनुर्वेदसंहिता’ मूलमात्र मुझको इलाका जयपुर के सनथला बनथली कोढ़ा के मोलकराम ब्राह्मण के पास से लिखने को संवत् १९३३ में चुरू रामगढ़ में मिली जब से यह धरी थी। अब एक प्रति खड्गविलासयंत्रालय की छपी हुई देखने में आई तथा १ पुस्तक अलीगढ़ के जिले में छपी। इसको देखकर हमने भी अपनी पुस्तक पण्डित ईश्वरीप्रसादजी पाण्डे को दिखाई। इनकी आज्ञानुसार इसकी भाषा अति परिश्रम करके बनाई। परिश्रम का फल यथाशक्ति पण्डितजी से पाया। अब इस पुस्तक का सर्वाधिकार श्रीमान् खेमराज श्रीकृष्णदास “श्रीवेङ्कटेश्वर” (स्टीम्) यन्त्रालयाधिप को समर्पण कर दिया। पण्डित हरदयालु स्वामी, ग्राम कंबाली निवासी रिवाडी-गुडगांव.