भारतकोश
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished634 पृष्ठ

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प्रेतकल्प ] वैकुण्ठलोकका वर्णन एवं प्रेतकल्पका उपक्रम ४४७


हे प्रभो! आप यह बतानेकी कृपा करें कि मृत्युको प्राप्त हुआ प्रेत किस कारण पृथ्वीपर डाल दिया जाता है?

उसके मुखमें पञ्चरत्न<sup></sup> क्यों डाला जाता है? मरे हुए प्राणीके नीचे लोग कुश किसलिये बिछा देते हैं? उसके दोनों पैर दक्षिण दिशाकी ओर क्यों कर दिये जाते हैं? मरनेके समय मनुष्यके आगे पुत्र-पौत्रादि क्यों खड़े रहते हैं? हे केशव! मृत्युके समय विविध वस्तुओंका दान एवं गोदान किसलिये दिया जाता है? बन्धु-बान्धव, मित्र और शत्रु आदि सभी मिलकर क्यों क्षमा-याचना करते हैं? किससे प्रेरित होकर लोग मृत्युकालमें तिल, लोहा, स्वर्ण, कपास, नमक, सप्तधान्य<sup></sup>, भूमि और गौका दान देते हैं? प्राणी कैसे मरता है और मरनेके बाद कहाँ जाता है? उस समय वह आतिवाहिक शरीर (निराधार-रूपमें आत्माको वहन करनेवाले शरीर)-को कैसे प्राप्त करता है? अग्नि देनेवाले पुत्र और पौत्र उसे कन्धेपर क्यों ले जाते हैं? शवमें घृतका लेप क्यों किया जाता है? उस समय एक आहुति देनेकी परम्परा कहाँसे चली है? शवको भूमिस्पर्श किसलिये करवाया जाता है? स्त्रियाँ उस मरे हुए व्यक्तिके लिये क्यों विलाप करती हैं? शवके उत्तर दिशामें 'यमसूक्त'का पाठ क्यों किया जाता है? मरे हुए व्यक्तिको पीनेके लिये जल एक ही वस्त्र धारण करके क्यों दिया जाता है? उस समय सूर्य-बिम्ब-निरीक्षण, पत्थरपर स्थापित यव, सरसों, दूर्वा और नीमकी पत्तियोंका स्पर्श करनेका विधान क्यों है? उस समय स्त्री एवं पुरुष दोनों नीचे-ऊपर एक ही वस्त्र क्यों धारण करते हैं? शवका दाह-संस्कार करनेके पश्चात् उस व्यक्तिको अपने परिजनोंके साथ बैठकर भोजनादि क्यों नहीं करना चाहिये? मरे हुए व्यक्तिके पुत्र दस दिनके पूर्व किसलिये पिण्डोंका दान देते हैं? चबूतरे (वेदी)-पर पके हुए मिट्टीके पात्रमें दूध क्यों रखा जाता है? रस्सीसे बँधे हुए तीन काष्ठ (तिगोड़िया)-के ऊपर रात्रिमें गाँवके चौराहेपर एकान्तमें वर्षपर्यन्त प्रतिदिन दीपक क्यों दिया जाता है? शवका दाह-संस्कार तथा अन्य लोगोंके साथ जल-तर्पणकी क्रिया क्यों की जाती है? हे भगवन्! मृत्युके बाद प्राणी आतिवाहिक शरीरमें चला जाता है, उसके लिये नौ पिण्ड देने चाहिये, इसका क्या प्रयोजन है? किस विधानसे पितरोंको पिण्ड प्रदान करना चाहिये और उस पिण्डको स्वीकार करनेके लिये उनका आवाहन कैसे किया जाय?

हे देव! यदि ये सभी कार्य मरनेके तुरंत बाद सम्पन्न हो जाते हैं तो फिर बादमें पिण्डदान क्यों किया जाता है? पूर्व किये गये पिण्डदानके बाद पुनः पिण्डदान या अन्य क्रियाओंको करनेकी क्या आवश्यकता है? दाह-संस्कारके बाद अस्थि-संचयन और घट फोड़नेका विधान क्यों है? दूसरे दिन और चौथे दिन साग्निक द्विजके स्नानका


१-सोना, चाँदी, मोती, लाजावर्त (लाजवर्द) तथा मूँगा—ये पाँच पञ्चरत्न कहलाते हैं।
२-जौ, धान, तिल, कँगनी, मूँग, चना तथा साँवा—ये सप्तधान्य कहलाते हैं।