गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 589, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ेंओं३म् गोपथब्राह्मण भाष्य में वेदमन्त्र, ब्राह्मण वचन आदि की वर्णानुक्रमणसूची ॥ भाग, भाग; मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ कण्डिका कण्डिका अ अभि तष्टेव दीधया उ ६, २ ४१६ अभि प्र वः सुरा उ ६, ७ ५१२ अथँ शुग्गुँशुष्टे उ २, ४ ३१३ अभूद् देवः सवि उ ४, ७ ४२५ अग्न आ याहि पू १, २६ ५३ अमेव नः सुहवा उ २, २२ ३५८ अग्निं होतारं मन्ये उ ६, १० ५२१ अमोऽहमस्मि सा त्वं उ ३, २० ४०४ अग्निं दूतं वृणीमहे पू २; २३ १२६ अयं त इध्म आत्मा उ १, ४ २७० अग्निं दूतं वृणीमहे उ ३, १२ ३८५ अयं ते योनिऋतं उ ४, ६ ४२६ अग्निमीडे पुरोहितम् पू १, २९ ५२ अयं नो नमसस्प उ ४, ६ ४२८ अग्निमीडे पुरोहितम् उ १, ४ २७० अयमु त्वा विचर्ष उ ३, १४ ३६१ अग्निर्विद्वान् यज्ञं पू १, १२ २५ अथर्वदधातुरप्रत्ययः पू १, २६ ४५ अग्निवासाः पृथि पू २, ६ ६७ अवर्डेहि सोमकामं उ २, २१ ३५४ अग्नीषोमावदधु उ २, ६ ३२७ अव द्रप्सो अंशु उ ६, १६ ५४७ अग्ने पत्नीरिहा उ २, २० ३५१ असि यमो अस्यादि पू २, २१ १२५ अच्छा म इन्द्रं उ ४, १६ ४४४ अस्तम्नाद् द्यामसुरो उ ४, १५ ४४६ अदितेऽनुमन्यस्व उ १, ४ २७१ अस्मा इदु प्र तवसे उ ५, १५ ४८५ अघा हीन्द्र गिर्वण उ ४, १७ ४४७ अस्मे प्र यन्धि मघ उ ४, ३ ४१९ अधिपतिरसि उ २, १४ ३३६ अस्य देवाः प्रदिशि उ ५, ८ ४७२ अनितिरसि उ २, १३ ३३५ अहन् वृत्रं वृत्रतरं उ ५, ६ ४६७ अनुख्यात्रे नमः उ २, १६ ३४८ आ अनुमतेऽनुमन्यस्व उ १, ४ २७१ आक्रमो ऽसि उ २, १४ ३४० अनुरोहोऽसि उ २, १४ ३३६ आग्निरगामि भारतो उ ४, १५ ४३६ अनुवृदसि उ २, १४ ३३६ आचार्यो ब्रह्मचारी पू २, ५ ८५ अन्तरिक्षे पथिभिः पू २, ६ ६७ आदित्या रुद्रा वसव उ ६, १४ ५४२ अप प्राच इन्द्र विश्वाँ उ ६, ८ ५१६ आदित्या ह जरितर उ ६, १४ ५४२ अपेन्द्र प्राचो मध उ ६, ४ ५२५ आ नो याहि सुता उ ३, १४ ३६१ अपेन्द्र प्राचो मध उ ६, १२ ६४७ आपतये त्वा परि उ २, ३ ३१० अभिजिदसि उ २, १३ ३३८ आ पूर्णो अस्य कलश उ २, २१ ३५५ अभि तष्टेव दीधया उ ६, १२ ४६३