गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished600 पृष्ठ
पृष्ठ 588, कुल 600 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 588
५५० गोपथब्राह्मणे उत्तरभागे प्र० ६ । क० १६ (नृमणाः) नरों के समान मन वाले (इन्द्रः) इन्द्र [बड़े प्रतापी शूर] ने (तम् धमन्तम्) उस हांफते हुये को (शच्या) बुद्धि से (आवत्) बचाया है और (स्नेहिताः) अपनी मारू सेनाओं को (अप अधत्त) हटा लिया है ॥
इति श्रीमद्राजाधिराज प्रथितमहागुणमहिम श्रीसयाजीराव गायक वाडा- धिष्ठित बड़ोदेपुरीगतश्रावणमासदक्षिणापरीक्षायाम् ऋक्सामार्थववेदभाष्येषु लब्धदक्षिणेन श्री पण्डित 'क्षेमकरणदासत्रिवेदी' अथर्ववेदभाष्यकारेण कृते गोपथब्राह्मणभाष्य उत्तरभागे षष्ठः प्रपाठकः समाप्तः ॥
अयं प्रपाठको ग्रन्थश्च प्रयागनगरे भाद्रमासे कृष्णजन्माष्टमीं तिथौ १९८१ तमे [एकाशीत्युत्तरैकोनविंशतिशतके] विक्रमीये संवत्सरे सुसमाप्तिमगात् ॥
[मुद्रितम्-मार्गशीर्षकृष्णा ८ संवत् १९८१ वि० ता० १६ नवम्बर सन् १९२४ ई० ॥]
क्षेमकरणदास त्रिवेदी । ५२ लूकरगंज, प्रयाग, जन्म, कार्तिक शुक्ला ७ संवत् १९०५ [इलाहाबाद] विक्रमीय [ता० ३ नवम्बर १८४८ ईस्वी] भाद्रकृष्ण ८ संवत् १९८१ वि० जन्मस्थान, ग्राम शाहपुर-मडराक, ता० २२ अगस्त १९२४ ई० ॥ जिला अलीगढ़ ॥ समाप्तम्