भारतकोश
गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi

महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished600 पृष्ठ

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परोक्षेण परोक्षप्रिया ( ५५५ ) यमेन दत्तं त्रित एनमा मन्त्र आदि भाग, प्रपाठक, कण्डिका पृष्ठ मन्त्र आदि भाग, प्रपाठक, कण्डिका पृष्ठ परोक्षेण परोक्षप्रिया पू २, २१ १२४ भ परोक्षेण परोक्षप्रिया पू ३, १६ १७१ भुगित्यभिगतः उ ६, १३ ५३६ परोक्षेण परोक्षप्रिया पू ४, २३ २०८ भूय इदद् वावृधे उ ४, ३ ४१८ पिबा वर्धस्व तव उ ४, ३ ४१६ भूयसीः शरदः श पू २, ८ ६२ पिबा सोममभि उ २, २१ ३५३ भूर्भुवः स्वद्यौरिच उ १, ४ २७० पूर्णात् पूर्णमुदचति पू १, ७ १७ म पृतनाषाडसि उ २, १३ ३३८ पृथिव्यै श्रोत्राय पू १, १४ २६ मरुतां मन्वे अधि मे उ २, ८ ४७२ प्रकेतो ऽसि उ २, १३ ३३७ मरुता मा गणैर उ ५, ८ ४७२ प्रतिधिरसि उ २, १३ ३३७ मरुतो यस्य हि उ २, २० ३५१ प्रतीपं प्राति सुत्वनम् उ ६, १३ ५३६ मित्रं वयं हवामहे उ २, २० ३५१ प्रत्ययलोपे प्रत्यय पू १, २६ ४५ प्रत्यु अदश्ययित्यु उ ५, १ ४५६ य प्र मंहिष्ठाय बृहते उ ४, १६ ४४४ यः सभेयो विदथ्यः उ ६, १२ ५३२ प्र मित्रयोर्वरुणयोः उ ३, १३ ३८६ य एक इद् धव्यश्च उ ६, १ ४६३ प्ररोहो ऽसि उ २, १४ ३३६ यच् चिद्धि सत्य उ ६, १ ४६४ प्रवृदसि उ २, १४ ३३६ यजामह इन्द्रं उ ६, १ ४९४ प्र वो महे मतयो य उ ६, ७ ५१२ यजूंषि यज्ञे समिधः उ २, ११ ३३२ प्र वो मित्राय गायत उ ३, १३ ३८८ यज्ञकर्मण्यजप उ ६, १ ४६४ प्राणापानौ जनयन् पू २, ८ ६२ यज्ञेन यज्ञमयजन्त उ २, ११ ३३२ प्रातर्यावभिरागंतं उ २, २१ ३६३ यत्र क्व च ते उ ४, ११ ४३४ प्रातर्यावभिरागंतं उ ३, १५ ३५२ यत् ते अन्नं भुवस्प उ ५, ८ ४७१ प्रावोस्यह्वां१३सीति उ २, १३ ३३५ यत् सोम आ सुते नर उ ५, १२ ४८० प्रेतिरसि उ २, १३ ३३६ यदक्रन्दः प्रथमं पू २, १८ ११४ प्रेन्द्रस्य वोचं प्र उ ३, २३ ४१० यदक्रन्द; प्रथमं पू २, २१ १२५ ब यदस्य कर्मणोऽत्य उ ३, १ ३६२ बृहस्पतिर्नः परिपातु उ ४, १६ ४४४ यदस्य कर्मणोऽत्य उ ३, १६ ३६५ बृहस्पते युवमिन्द्रश्च उ ४, १६ ४४५ यदस्य कर्मणोऽत्य उ ४, १८ ४५० बृहस्पतये स्तुत उ २, १४ ३३६ यदस्य अंहुभेद्याः उ ६, १५ ५४५ ब्रह्मचर्यंप्रतिष्ठायां पू २, १ ७७ यदिन्द्रादो दाश उ ६, १२ ५३२ ब्रह्मचारीष्णं पू २, १ ७६ यद् गायत्रे अधि उ ३, १० ३८२ ब्रह्मचार्येति समिधा पू २, १ ७७ यन्न इन्द्रो जुजुपे उ ६, १ ४६२ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमम् उ २, ६ ३२० यमेन दत्तं त्रित एनमा पू २, २१ १२५ ब्रह्मणा ते ब्रह्मायुजा उ ६, ४ ५०३ ब्रह्मा स्यात् स्तुते उ २, १५ ३४१