भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ

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श्रीहरिः

सटीक महाभारत-खिलभाग हरिवंशकी सम्पूर्ण विषय-सूची

( हरिवंशपर्व )

अध्यायविषयपृष्ठ-संख्याअध्यायविषयपृष्ठ-संख्या
१-मङ्गलाचरण, शौनक-उग्रश्रवा-संवाद, वृष्णिवंशियोंका विस्तृत चरित्र सुननेके लिये जनमेजयकी प्रार्थना और आदिसृष्टिका वर्णन१५-सूर्यवंशका वर्णन५३
२-स्वायम्भुव मनुके वंश और दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्तिका वर्णन१६-श्राद्धकल्प-जनमेजयद्वारा पिताका श्राद्ध तथा पितृस्वरूपनिर्णयसम्बन्धी प्रश्न, शान्तनुका अपने श्राद्धमें स्वयं हाथ बढ़ाकर भीष्मसे पिण्ड माँगना५५
३-दक्ष प्रजापतिद्वारा सृष्टि-विस्तार, नारदजीका दक्षके पुत्रोंको विरक्त कर देना, दक्षकी साठ कन्याओं और उनकी संततिका वर्णन१७-पितृकल्प-भीष्म-मार्कण्डेय-संवाद और मार्कण्डेयजीके साथ सनत्कुमारजीकी बातचीत५९
४-पृथुका उपाख्यान-राज्यवितरण और दिक्पालोंकी प्रतिष्ठा१८१८-पितृकल्प-मार्कण्डेय-सनत्कुमार-संवादमें पितरोंके गण, लोक, शक्ति और कन्याओंका वर्णन तथा पितरोंके प्रभावको देखनेके लिये मार्कण्डेयजीको दिव्य दृष्टिकी प्राप्ति६१
५-पृथुका उपाख्यान—वेनका अत्याचार करके नष्ट होना और पृथुका जन्म तथा चरित्र२०१९-पितृकल्प-भरद्वाजके पुत्रोंकी कथा, योगभ्रष्ट पुरुषोंकी गति, योगसिद्धिके अधिकारी पुरुषोंके लक्षण तथा मार्कण्डेय-सनत्कुमार-संवादकी समाप्ति६७
६-पृथुका उपाख्यान-पृथ्वीका पृथुकी पुत्री बनकर अनेक प्रकारके दूध देना तथा अनेक पात्रों एवं दुहनेवालोंका वर्णन२४२०-पितृकल्प-ब्रह्मदत्त और उग्रायुधके वंश तथा पूजनीया चिड़ियाद्वारा शुकनीतिका वर्णन६८
७-मन्वन्तर, मनु, देवता और ऋषियोंका पृथक्-पृथक् वर्णन२८२१-पितृकल्प—मार्कण्डेयजी द्वारा श्राद्धकी महिमाका वर्णन, श्राद्धके फलसे कौशिक-पुत्रोंको उत्तम जन्मकी प्राप्ति७७
८-चारों युगों, मन्वन्तरों और ब्रह्माजीके दिन एवं वर्षका मान३३२२-पितृकल्प—शुचिवाक् पक्षीका स्वतन्त्र आदि तीन पक्षियोंको शाप देना, सुमना पक्षीका अनुग्रहपूर्वक उन्हें शापसे मुक्त करना८०
९-वैवस्वत मनु, यम, यमी (यमुना), अश्विनीकुमारों एवं शनैश्चरकी उत्पत्ति३६२३-हंसोंका काम्पिल्यनगरमें ब्रह्मदत्त आदिके रूपमें उत्पन्न होना और चार हंसोंका अपने पितासे आज्ञा लेकर मुक्त हो जाना८१
१०-वैवस्वत मनुके वंशजोंका वर्णन और पुरूरवाकी उत्पत्ति४०२४-विभ्राजका ब्रह्मदत्तका पुत्र बनकर उत्पन्न होना, रानी संमतिका ब्रह्मदत्तसे रूठना, एक ब्राह्मणके कहे हुए श्लोकोंसे ब्रह्मदत्त, पाञ्चाल्य और कण्डरीकको अपने पूर्वजन्मका ज्ञान होना तथा ब्रह्मदत्त आदिका तप करके मुक्त हो जाना८३
११-धुन्धुमारकी कथा४३
१२-धुन्धुमारके वंशका वर्णन और गालवकी उत्पत्ति४७
१३-त्रिशङ्कुके चरित्रका वर्णन तथा उनके वंशमें हरिश्चन्द्र आदिका उत्पन्न होना४८
१४-सगरकी उत्पत्ति और चरित्र तथा सगर-पुत्रोंके उद्योगसे समुद्रका 'सागर' होना५१

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