हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 15, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज्य कांग्रेस का मकसद हासिल करने के लिए अपना तन, मन और धन सब दे दिया था। उन्होंने अंग्रेजी राज्य के बारे में जो लेख लिखे हैं, वे आज भी पढ़ने लायक हैं। प्रोफेसर गोखले ने जनता को तैयार करने के लिए भिखारी के जैसी हालत में रहकर अपने बीस साल दिये हैं। आज भी वे गरीबी में रहते हैं। मरहूम जस्टिस बदरुद्दीन ने भी कांग्रेस के जरिये स्वराज्य का बीज बोया था। यों बंगाल, मद्रास, पंजाब वगैरह में कांग्रेस का और हिंद का भला चाहने वाले कई हिन्दुस्तानी और अंग्रेज लोग हो गये हैं, यह याद रखना चाहिए। पाठक : ठहरिये, ठहरिये। आप तो बहुत आगे बढ़ गये। मेरा सवाल कुछ है कर्त्तव्य पालन में और आप जवाब कुछ और दे रहे हैं। मैं स्वराज्य की बात से ही हक पैदा करता हूँ और आप परराज्य की बात करते हैं। मुझे अंग्रेजों होता है। हम बड़ी का नाम तक नहीं चाहिए और आप तो अंग्रेजों के नाम देने बातों को मत लगे। इस तरह तो हमारी गाड़ी राह पर आये, ऐसा नहीं सोचें, अच्छी दिखता। मुझे तो स्वराज्य की ही बातें अच्छी लगती हैं। बातें सोचें। दूसरी मीठी सयानी बातों से मुझे संतोष नहीं होगा। संपादक : आप अधीर हो गये हैं। मैं अधीरपन बरदाश्त नहीं कर सकता। आप जरा सब्र करेंगे तो आपको जो चाहिए वही मिलेगा। 'उतावली से आम नहीं पकते, दाल नहीं चुरती' यह कहावत याद रखिए। आपने मुझे रोका और आपको हिन्द पर उपकार करने वालों की बात भी सुननी अच्छी नहीं लगती, यह बताता है कि अभी आपके लिए स्वराज्य दूर है। आपके जैसे बहुत से हिन्दुस्तानी हों तो हम स्वराज्य से दूर हटकर-पिछड़ जाएँगे। वह बात जरा सोचने लायक है। पाठक : मुझे तो लगता है कि ये गोल-मोल बातें बनाकर आप मेरे सवाल का जवाब उड़ा देना चाहते हैं। आप जिन्हें हिन्दुस्तान पर उपकार करने वाले मानते हैं, उन्हें मैं ऐसा नहीं मानता, फिर मुझे किसके उपकार की बात सुननी है ? आप जिन्हें हिन्द के दादा कहते हैं, उन्होंने क्या उपकार किया ? वे तो कहते हैं कि अंग्रेज राजकर्ता न्याय करेंगे और उनसे हमें हिलमिल कर रहना चाहिए। संपादक : मुझे सविनय आपसे कहना चाहिए कि उस पुरुष के बारे में आपका बेअदबी से यों बोलना हमारे लिए शर्म की बात है। उनके कामों की 14