भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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हिन्द स्वराज्य की ज़रूरत गांधीजी ने अपने जीवन में लाखों पत्र अवश्य लिखे लेकिन पुस्तकें ज्यादा नहीं लिखीं। उनकी जो बातें हम पढ़ते हैं वो अधिकत्तर उनके भाषणों तथा बातचीत आदि के हिस्से हैं। उन्होंने बहुत कम लिखा लेकिन उस कम में हिन्द स्वराज्य की गिनती प्रमुख है। यह पुस्तक भी 1909 में उन्होंने उस समय लिखी जब उनका प्रवेश भारतीय राजनीति में पूरी तरह हुआ भी नहीं था। फिर भी यह छोटी सी पुस्तक गांधीजी की आत्मा कही जाती है। आज इस पुस्तक को लिखे 100 वर्ष पूरे हो गये हैं। शताब्दी वर्ष के निमित्त देश और दुनिया में हिन्द स्वराज्य में लिखे गये विचारों का विस्तार से विश्लेषण हुआ है। अनेक विद्वानों ने, चिन्तकों ने, ज़मीन पर काम करने वाले लोगों ने, जन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने ढंग से इस पुस्तक की प्रासंगिकता पर खूब प्रकाश डाला है। सभी ने एक स्वर में कहा है कि आज पूरी दुनिया और हमारा देश जिस तरह से संकटों से गुज़र रहा है उनसे संभलने का एक ही रास्ता है, वह है हिन्द स्वराज्य। देश और दुनिया के आगे ध्रुव तारा सा बन गई इस पुस्तक को अपने मूल स्वरूप में प्रकाशित करने का हमारा मकसद केवल इतना ही है कि हमारे लोग आर्थिक, राजनीतिक संकट के इस कठिन दौर में इस पुस्तक से प्रेरणा लेकर अपने-अपने कर्त्तव्यों को पूरा करने की दिशा में क़दम उठाएं। शताब्दी वर्ष के निमित्त हिन्द स्वराज्य के मूल पाठ को आपके हाथ में देते हुए हमें धन्यता का अनुभव हो रहा है। 3