हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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हिंदु यवनों के शासन को अधिक काल के लिए सहन न कर सके। इस पत्र में उन लोगों ने धर्मान्ध, अन्यायी यवनों के शासन का रोमाञ्चकारी नग्न चित्र खींचते हुए लिखा था -- "हम लोग विधर्मियों के निर्दयी राज्य से अत्यन्त पीड़ित हैं, धर्म नित्य पैरों तले कुचला जा रहा है, और हमारा धर्म मिट्टी में मिलाया जा रहा है। इसलिये हे हिन्दू-धर्म के रक्षक ! दुष्टों का दमन करने वाले ! विदेशी राज्य को धूल में मिलाने वाले शिवाजी महाराज ! आइये, शीघ्र आइये; हम लोग इस समय सेनापति यूसुफ तथा उनकी सेना के अधीन हैं। हमारा धन जन उन्ही के हाथ में है। इसने हमें अपने ही घरों में कैदी बना रखा है। द्वार पर कठिन पहरा बिठा दिया है। हमारा अन्न जल रोक कर यह हमें भूखों मारने का प्रयत्न कर रहा है। इसको मालूम हो गया है कि हम लोग आपसे सहानुभूति रखते हैं और आपके बुलाने के लिये षड्यन्त्र रच रहे हैं। इसलिये हम दीन हिन्दुओं पर दया कर, रात को दिन समझें, और जितना शीघ्र होसके आकर हमें काल के गाल से छुड़ाने की कृपा करें।" महाराष्ट्र की सीमा के बाहर वाले हिन्दुओं के आर्त्तनाद ने शिवाजी के हृदय पर कैसा प्रभाव डाला, यह लिखना व्यर्थ है, क्योंकि जिनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य ही हिन्दू-धर्म की रक्षा करना था, वे भला ऐसे अवसर पर कैसे विलम्ब कर सकते थे ! शीघ्र ही मरहटों का प्रसिद्ध सेनापति "हम्भीरराव" अपनी सेना लेकर वहां जा पहुंचा और उसने बीजापुर की यवन सेना को कई युद्धस्थलों पर पूर्ण रूप से पराजित किया और हिन्दुओं को मुसलमान अन्याथियों के चंगुल से छुड़ा कर उस प्रान्त को म्लेच्छ शासन से मुक्त करा दिया। पूना और सूपा की छोटी जागीरों का उचित प्रबन्ध करके, तथा अपने बारह मावलों (जिलों) को पूर्ण रूप से संगठित करने के अनन्तर, शिवाजी ने लगभग १६ वर्ष की अवस्था में अपने कुछ चुने- हुए प्रमुख वीरों की सहायता से उस प्रान्त के तोराना और दूसरे प्रसिद्ध