भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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हूँ जो भस्म हो जाऊँ। सन््यासी ने चकित होकर स्त्री से पूछा, देवी तुम्हें कौन-सी शक्ति प्राप्त है जिससे तुमने यह जान लिया कि मैंने वन में चिड़िया को भस्म किया था। स्त्री ने कहा महाराज यह शक्ति मुझे पति सेवा से प्राप्त हुई है। जब आपने भिक्षा माँगी थी उस समय मैं अपने पति की सेवा कर रही थी, जब सेवा से निवृत्त हुई तभी आपके लिए आटा लाई हूँ।

महाभारत

पति यानाभिचरति मनो वाग्देहसंयता। सामर्तूलोकमाप्नोति सधिदः साध्वीतिचोच्यते॥

मनु ५/१६५

अर्थ- मन वाणी देह से जो पति को दुःख नहीं देती वह पति लोक को प्राप्त होती है और अच्छे पुरुष उसको साध्वी कहते हैं।

पुरुषों को पर स्त्री गमन नहीं करना चाहिए और स्त्रियों को पर पुरुष गमन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस कर्म के करने से स्त्री पुरुष दोनों को ही इस पाप कर्म का फल भोगना होता है।

न ही दूशमानायुष्यं लोके किञ्चन विद्यते।

यादृशं पुरुषस्येह परदारोपसेवनम्॥

मनु ४/१३४

अर्थ- इस प्रकार का आयुक्षय करने वाला संसार में दूसरा कोई कर्म नहीं है (जैसा मनुष्य की आयु घटाने वाला) दूसरे की स्त्री का सेवन है।

परदारान् गच्छेच्च मनसापि कथञ्चन।

किमु वाचास्थिबन्धोऽपि नास्ति तेषु व्यवधानिम्॥

विष्णु पुराण ३/१२/१२३

अर्थ- पर स्त्री से तो वाणी से क्या मन से भी प्रसंग न करे, क्योंकि उनसे मैथुन करने वालों को अस्थि बन्धन भी नहीं होता अर्थात् उन्हें अस्थि शून्य कीटादि होना पड़ता है।

इस लिये स्त्रियों पतिव्रता और पुरुष पत्नीव्रत धर्म का पालन करें।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri