भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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ब्रह्ममुहूर्त में पढ़ने योग्य मंत्र पाठ।

ओं प्रातरर्गिन प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्भिन्नावरुणा प्रातरशिवना।

प्राभर्गं पृषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रातस्सो ममृत रुद्रं हुवेम॥१॥

ओं प्रातर्जितं भगमुग्रं हुवेम वयं पुत्रमदितेतो विधत्ता।

आध्रशिचर्घं मन्य मानस्तुरिचिद्राजा विघ्नां भगं भस्तीत्याह॥२॥

ओं भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगो धियमुदवा ददन्तः।

भगप्रणो जनय गोभिर्शर्वैर्भग प्र नृभिनृं वन्तः स्याम॥३॥

ओं उतेदानीं भगवन्तः स्यामोत प्रपित्त्व उत मध्ये अहहनाम्।

उतोदिता मघवन्सूर्यस्य वयं देवानां सुमती स्याम॥४॥

ओं भग एव भगवीं अस्तु देवास्तेनवयं भगवन्तः स्याम।

तं त्वा भग सर्वं इज्जोहवीति स नो भग पुरएताः

ब्रह्मवेद ७/४१/१ से ५ तक

अर्थ- हे स्त्री पुरुषों! जैसे हम विद्वान् उपदेशक लोग प्रभातवेला में स्वप्रकाशस्वरूप परम ऐश्वर्य के दाता और परमेश्वर्ययुक्त, प्राण उदान के समान प्रिय और सर्वशक्तिमान सूर्य, चन्द्र को जिसने उत्पन्न किया है, उस परमात्मा की स्तुति करते हैं और भजनीय, सेवनीय, ऐश्वर्य युक्त, पुष्टिकर्ता, अपने उपासक, वेद और ब्रह्माण्ड के पालन हारे, अन्तर्धानी प्रेरक और पापियों को रलाने हारे और सर्वरोगनाशक जगदीश्वर की स्तुति प्रार्थना करते हैं, वैसे तुम लोग भी किया करो॥१॥

प्रातः पाँच घड़ी रात्रि रहे, जयशील ऐश्वर्य के दाता, तेजस्वी, अन्तरिक्षस्य सूर्य की उत्पत्ति करने हारे और जो कि सूर्यादि लोकों का विशेष करके धारण कर्ता, सब का जानने हारा, दुष्टों का भी दण्डदाता और सबका प्रकाशक है- उस भजनीय स्वरूप को इस प्रकार सेवन करता है और भगवान् परमेश्वर भी इसी प्रकार सबको उपदेश करता है कि 'जो मैं सूर्यादि जगत् को बनाने और धारण करने हारा हूँ, उस मेरी आज्ञा में तुम चला करो'॥२॥

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri