भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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( १६ )

मन्त्रविषयपृष्ठ
परब्रह्मके दूसरे चरण प्रकाशमय हिरण्यगर्भरूप 'तैजस'का वर्णन .....२८६
परब्रह्मके तीसरे चरण विज्ञान आनन्दमय 'प्राज्ञ' का वर्णन .....२८८
उक्त तीन पादोंद्वारा जिसके स्वरूपका लक्ष्य कराया गया है, उसे सर्वान्तर्यामी, सर्वेश्वर, सर्वज्ञ और सबका कारण बतलाना .....२९०
परब्रह्मके चतुर्थ चरण निर्गुण-निराकार निर्विशेष स्वरूपका वर्णन .....२९०
नामी—परब्रह्म परमात्माकी उनके नाम—प्रणवकी तीन मात्राओंके साथ तीनों पदोंकी एकताका निरूपण .....२९२
वैश्वानर नामक पहले चरणके साथ पहली मात्रा 'अ'कारकी एकता और उसके ज्ञानसे सम्पूर्ण भोगोंकी प्राप्तिरूप फल .....२९२
१०तैजस नामक दूसरे चरणके साथ दूसरी मात्रा 'उ'कारकी एकता और उसके ज्ञानसे ज्ञानपरम्पराके उत्कर्ष और स्वभावकी प्राप्तिरूप फल .....२९३
११प्राज्ञ नामक तीसरे चरणके साथ तीसरी मात्रा 'म'कारकी एकता और उसके ज्ञानसे सम्पूर्ण जगत्का ज्ञान तथा सर्वत्र परब्रह्मदृष्टिरूप फल .....२९५
१२मात्रारहित अकारकी परमेश्वरके चौथे चरण—निर्विशेष रूपके साथ एकता और उसके ज्ञानमें परब्रह्मकी प्राप्तिरूप फल .....२९६
शान्तिपाठ .....२९७

( ७ ) ऐतरेयोपनिषद्

उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ .....२९८

प्रथम अध्याय

( प्रथम खण्ड )
१ परमात्माके सृष्टिचनाविषयक प्रथम संकल्पका वर्णन .....३००
२—४ परमात्माके द्वारा समस्त लोकोंकी और ब्रह्मा तथा अन्य लोकपालोंकी एवं वागादि इन्द्रियों और उनके अधिष्ठातृ-देवताओंकी उत्पत्तिका निरूपण .....३००
( द्वितीय खण्ड )
१ इन्द्रियों और उनके अधिष्ठाता देवताओंद्वारा वासस्थान और अन्नकी याचना .....३०४
२ परमात्माद्वारा गौ तथा अश्व-शरीरकी रचना और देवताओंका उनको पसंद न करना .....३०५
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